रक्सौल में ओवरब्रिज निर्माण शुरू। (AI Generated Image)
जागरण संवाददाता, रक्सौल (पूच)। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में स्थित रेलवे फाटक संख्या 33 एवं 34 पर शिलान्यास के करीब दो दशक बाद आखिरकार ओवरब्रिज निर्माण की प्रारंभिक प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू कर दी गई।
ऊक्त दोनों ब्रिज के लिए करीब 157 करोड़ राशि केंद्र सरकार ने निर्गत किया है। इसकी जानकारी रेलवे सूत्रों ने दी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर क्षेत्रवासी लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे।
वर्षों से रेलवे क्रासिंग पर लगने वाले भीषण जाम से जूझ रहे लोगों के लिए अब राहत की उम्मीद जगी है। बताया जाता है कि बेतिया के सांसद डॉ. संजय जायसवाल एवं स्थानीय विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयासरत थे। अंततः उनकी पहल रंग लाई और रक्सौल रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण की दिशा में ठोस कदम बढ़ा।
निर्माण एजेंसी क्लासी इंजीनियरिंग कंपनी की टीम ने स्थल पर पहुंचकर भू-जल स्तर मापन एवं तकनीकी सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। सर्वे के तहत मिट्टी की जांच, नींव की संभावनाओं का आकलन तथा संरचनात्मक डिजाइन के लिए आवश्यक आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि यह रेलवे क्रासिंग भारत-नेपाल सीमा से जुड़े अत्यंत व्यस्त मार्ग पर स्थित है। प्रतिदिन लगभग चार से पांच हजार छोटे-बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं।
ट्रेन गुजरने के दौरान घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी होती है। इसका सीधा प्रभाव रक्सौल और वीरगंज के बीच आवागमन तथा सीमाई व्यापार पर पड़ता रहा है।
ओवरब्रिज के निर्माण से न केवल जाम की समस्या से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था सुगम होगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
गौरतलब है कि पूर्व सांसद स्व. पंडित रघुनाथ झा के प्रयासों से तत्कालीन रेल मंत्री एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा इस परियोजना का शिलान्यास किया गया था। अब दो दशक बाद इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने से क्षेत्र में सकारात्मक माहौल है। |