मानबेला में खुला नाला बन रहा जानलेवा। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। महानगर के वार्ड नंबर पांच मानबेला क्षेत्र में खुले ट्रेंच में गिरने से 12 वर्षीय कन्हैया चौरसिया की मौत ने न केवल उसके परिवार बल्कि शहर को झकझोर दिया है। मासूम की असमय मौत ने विकास कार्यों की निगरानी और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ट्रेंच ढका होता तो शायद कन्हैया आज जिंदा होता।
जानकारी के अनुसार यह नाला और ट्रेंच निर्माण का कार्य जून 2025 में पूरा हो चुका था। इसके बावजूद कई स्थानों पर ट्रेंच को खुला छोड़ दिया गया। जहां घटना हुई वहां कई छड़ निकले हुए हैं। नीचे की ओर ढलाई भी नहीं हुई है।
प्राधिकरण के मुताबिक यह कार्य प्रभा कंस्ट्रक्शन फर्म द्वारा कराया गया था। सवाल यह है कि काम पूरा होने के बाद भी सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? फिलहाल घटना के बाद प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जवाबदेही तय की जाएगी।
मानबेला में जीडीए की कालाेनी के खुले नाले में गिरकर मासूम की मौत के बाद शोकाकुल कन्हैया की मां व भाई। जागरण
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उनके निर्देश पर प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह के नेतृत्व में अभियंताओं की टीम ने गुरुवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। बाद में उपाध्यक्ष स्वयं भी परिवार से मिले और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।
हालांकि यह पहली घटना नहीं है। पिछले वर्षा ऋतु में घोषीपुरवा क्षेत्र में नगर निगम के निर्माणाधीन खुले नाले में गिरने से एक आठ वर्षीय बच्ची की डूबकर मौत हो गई थी। उस समय भी जांच और कार्रवाई के आश्वासन दिए गए थे। हुआ कुछ नहीं।
घटना दुखद है। मानबेला में नाला और ट्रेंच का निर्माण कराया गया था जो पिछले साल जून 2025 में ही पूरा हो गया। नाले और ट्रेंच पर स्लैब भी लगवाए गए थे, लेकिन कुछ स्थानों पर चोरी हो गए। अभी हाल ही में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान भी जहां स्लैब चोरी हुए थे, वहां नए स्लैब ढालकर लगाए गए। मामले की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। जो भी दोषी पाया जाएगा कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित परिवार से भी मुलाकात कर उन्हें कार्रवाई के संबंध में आश्वस्त किया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक मदद भी दिलाई जाएगी। -
- आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए |