श्लोक मिश्र, बलरामपुर। राप्ती मुख्य नहर की राह में पड़ने वाले खरझार नाला पर साइफन को मजबूत किया गया है। साइफन के अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम नहर के आंतरिक स्लाेप पर बोल्डर व लाइनिंग की परियोजना पर एक करोड़ 97 लाख 81 हजार रुपये खर्च किए गए हैं।
इससे नाला के उफान से नहर कटने की समस्या से किसानों को मुक्ति मिलने का दावा किया जा रहा है। अब नहर के स्लोप मजबूत होते हैं या बजट पानी में बह जाता है, यह तो आगामी बारिश में ही पता चल सकेगा। फिलहाल साइफन पर हुए कार्य से किसानों को राहत की आस जगी है।
आकर मिलता है खरझार नाला
राप्ती मुख्य नहर के किमी 49.500 पर खरझार नाला आकर मिलता है। यहां तक की नहर सरयू नहर खंड बहराइच के अधीन आती है। किमी 50 से बलरामपुर का सीमा क्षेत्र शुरू होता है। राप्ती नहर व खरझार के मिलने वाले स्थान पर पानी का प्रवाह अत्यधिक तेज होने से अक्सर नहर कट जाती थी, जिससे क्षेत्र की हजारों बीघे फसल पानी में डूब जाती थी।
इस स्थान पर बने साइफन को मजबूत करने के लिए अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम नहर के आंतरिक स्लाेप पर बोल्डर व लाइनिंग की परियोजना दो करोड़ 51 लाख 83 हजार से स्वीकृत हुई। इस पर एक करोड़ 97 लाख 81 हजार के अनुबंध पर कार्य शुरू किया गया। फिलहाल कार्य पूर्ण कर लेने पर एक करोड़ 80 लाख 89 हजार रुपये का भुगतान भी हो चुका है। शेष 16 लाख 92 हजार रुपये भुगतान की भी स्वीकृति मिल गई है।
इन नहरों का नहीं कोई पुरसाहाल
सिंचाई विभाग के अभियंताओं की मनमानी से किसानों की मेहनत पर लगातार पानी फिर रहा है। महाराजगंज तराई क्षेत्र के गांवों के लिए राप्ती नहर का पानी अभिशाप बन गया है। कारण, अक्सर पानी छोड़ने पर कमजोर नहरें टूट जाती हैं।
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इससे पानी किसानों के खेत में भर जाता है। बीते दिनों लगातार नहर कटने से 550 बीघे फसल डूब चुकी है। इससे पूर्व सादुल्लाहनगर में भी नहर कटने पर 100 बीघे फसल जलमग्न होने से नष्ट हो गई। गोंडा व बलरामपुर कार्यक्षेत्र के विवाद में इस समस्या से निपटने का स्थाई उपाय नहीं किया जा रहा है।
इससे किसानों की फसलें तबाह हो रहीं हैं। किसानों ने कई बार नहर विभाग के विरुद्ध प्रदर्शन भी किया, लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगा।
खरझार नाला 49.500 किमी बहराइच के अधीन आता है। वहां साइफन का कार्य हुआ। जिले के अधीन आने वाली नहरों की मजबूती के लिए उच्चाधिकारियों व शासन को पत्र लिखा जा रहा है। -अखिलेश कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, सरयू नहर खंड-तृतीय |
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