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एमजीएम का फाइल फोटो।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। लौहनगरी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर चल रहा एक बड़ा सिंडिकेट और डेटा फर्जीवाड़ा बेनकाब हो गया है। जिला प्रशासन की सख्ती के बाद अस्पताल प्रबंधन ने स्वीकार किया है कि वर्ष 2021 से अब तक 6,000 से अधिक जन्म प्रमाण पत्र लंबित पड़े हैं, जबकि रिकॉर्ड्स में 96% काम पूरा होने का झूठा दावा किया जा रहा था।
उपायुक्त की सख्ती से खुला झूठ का पिटारा
पिछले काफी समय से जिले के उपायुक्त के पास शिकायतें पहुंच रही थीं कि एमजीएम अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों के माता-पिता को प्रमाण पत्र के लिए महीनों तक चक्कर कटवाए जा रहे हैं। कुछ मामलों में कर्मचारियों द्वारा 500 से 1000 रुपये तक की अवैध वसूली के भी आरोप लगे थे।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ने गहन जांच के आदेश दिए। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. जुझार माझी द्वारा की गई विभागीय समीक्षा में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि विभाग ने कागजों पर तो अपनी उपलब्धि शानदार दिखाई थी, लेकिन धरातल पर हजारों फाइलें धूल फांक रही थीं।
प्रशासन को गुमराह करने का आरोप, कर्मचारियों पर गिरेगी गाज जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि संबंधित विभाग के कुछ कर्मचारियों ने जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन को गुमराह करने के लिए फर्जी आंकड़े प्रस्तुत किए। लंबित आवेदनों को छिपाकर सिस्टम में यह दर्ज कर दिया गया कि अधिकांश प्रमाण पत्र जारी हो चुके हैं। उपायुक्त ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और धोखाधड़ी मानते हुए दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। हालांकि अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
नई व्यवस्था: अब सेम डे मिलेगा जन्म प्रमाण पत्र
इस घोटाले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने पूरी व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नई एसओपी(StandardOperatingProcedure) लागू कर दी है।
- उसी दिन प्रमाण पत्र: अब अस्पताल में बच्चे के जन्म के साथ ही उसी दिन उसका जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की अनिवार्य व्यवस्था की गई है।
- पेंडिंग क्लियरेंस अभियान: वर्ष 2021 से लंबित 6000 मामलों को निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
- सीधा संपर्क: एक समर्पित कर्मचारी को जिम्मेदारी दी गई है कि वह पेंडिंग लिस्ट के आधार पर अभिभावकों को फोन कर सूचित करे और उन्हें अस्पताल बुलाकर प्रमाण पत्र सौंपे।
- निगरानी प्रणाली: भ्रष्टाचार और देरी को रोकने के लिए एक नया मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया है जो सीधे उपाधीक्षक की देखरेख में काम करेगा।
यह गंभीर मामला है। संबंधित कर्मियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल कई सख्त कदम उठाए गए हैं। ताकि जल्द से जल्द सभी लोगों को जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जा सके। -
- डॉ. जुझार माझी, उपाधीक्षक, एमजीएम |
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