प्रयागराज के झूंसी में छतनाग में तेंदुआ देखे जाने की सूचना पर एचआरआइ में पहुंची वन विभाग की टीम। जागरण
संसू, झूंसी (प्रयागराज)। करीब डेढ़ महीने पहले छिवैया से तेंदुआ पकड़े जाने के बाद लगा था कि अब समस्या समाप्त हो गई, लेकिन शायद ऐसा हुआ नहीं। बुधवार रात छतनाग में ग्रामीणों ने एक बार फिर तेंदुआ देखा। उसे हरिश्चंद्र अनुसंधान संस्थान (एचआरआइ) में जाते देखा गया, जिससे आस-पास के इलाके में दहशत फैल गई है। हालांकि वन विभाग पगचिह्नों का हवाला देकर इसे जंगली बिल्ली बता रहा है।
तेंदुआ ने पूर्व में फैलाई थी दहशत
पिछले साल जंगलों से भटक कर एक तेंदुआ प्रयागराज आ गया था। कई महीनों तक वह यहां तराई में दहशत का पर्याय बना रहा। आए दिन किसी न किसी गांव में वह नजर आता था। एचआरआइ में कई बार कर्मचारियों ने उसे देखा था, लेकिन वन विभाग उसे पकड़ नहीं पा रहा था।
जनवरी में झूंसी के छिवैया से पकड़ा गया था एक तेंदुआ
आठ जनवरी को छिवैया गांव के एक घर में तेंदुआ घुस गया था, जिसके बाद वह पकड़ में आया था। वन विभाग ने उसे चित्रकूट के जंगल में छोड़ दिया था। विभाग के साथ ही तराई के गांवों में लोगों ने राहत महसूस किया था, लेकिन अब फिर से उनकी नींद उड़ गई है। दरअसल, एचआरआइ में बुधवार की देर रात एक कर्मचारी ने फिर तेंदुए की झलक देखी। ऐसा तब हुआ जब वह बचा हुआ खाना फेकने के लिए रात में निकला था। तेंदुए को देख उसके होश उड़ गए। आनन-फानन उसने साथी कर्मचारियों को खबर दी। सूचना मिलने पर गुरुवार को वन विभाग के डिप्टी रेंजर सत्येंद्र चौधरी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
सीसीटीवी में कैद हुई तस्वीर
एचआरआइ में लगे सीसीटीवी की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में एक जंगली जानवर गुजरते हुए दिख रहा है, लेकिन उसकी तस्वीर स्पष्ट नहीं। अफसरों ने मौके पर मिले पग चिन्हों को देखा। इसके आकार को देख अफसर पगचिन्ह जंगली बिल्ली के होने की आशंका जता रहे हैं।
क्या कहते हैं वन रेंजर
वन रेंजर एलके दुबे का कहना है कि एचआरआइ में तेंदुआ दिखने की सूचना मिली थी, लेकिन सीसीटीवी की फुटेज में वह स्पष्ट नहीं दिख रहा है। मौके से जो पग चिह्न मिले हैं, वह भी तेंदुआ के पगचिह्नों से काफी छोटे हैं। अनुमान है कि जिसकी तस्वीर सीसी कैमरे में कैद हुई है, वह जंगली बिल्ली है। |
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