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यूपी में किसान कर रहे हैं एक्स्ट्रा कमाई, ये तरीका आया काम

Chikheang 3 hour(s) ago views 912
  



संवाद सूत्र, जलालाबाद (शामली)। कृषि भूमि के बंटवारों से छोटे किसानों की संख्या बढ़ रही है। कम क्षेत्रफल में अधिक पैदावार हो सके, इसके लिए सह फसली खेती किसानों को रास आ रही है। जलालाबाद क्षेत्र में किसान इस पद्धति से फसलों की पैदावार लेकर कम लागत, कम जमीन में अधिक पैदावार कर रहे हैं।

जलालाबाद क्षेत्र कृषि धनी क्षेत्र माना जाता है। यहां पर सब्जियों की पैदावार के साथ धान, सरसों, गेहूं, धनिया, सौंफ, उड़द, मसरी की पैदावार की जा रही है। क्षेत्र में एक समय ऐसा रहा है कि यहां पर बड़ी जोत के किसानों की संख्या अधिक थी। अब पारिवारिक बंटवारे, आबादी में कृषि भूमि के जाने से यहां पर छोटी जोत के किसानों की संख्या अधिक है।

यहां के किसानों ने कम भूमि में अधिक पैदावार व आमदनी हासिल करने के लिए सह फसली खेती का प्रयोग शुरू किया है। गन्ने के साथ खीरे की खेती की जा रही है। एक ही खेत में टमाटर, हरी मिर्च, धनिया की बुवाई की गई है। सरसों की फसल में पपीते की पैदावार की जा रही है।

पपीता भी ऐसी वैरायटी का जिस पर कम से कम दो से तीन कुंतल पपीते की पैदावार होती है। लहसुन के साथ डोल पर धनिया व सौंफ की बुवाई की गई है। भिंडी, टमाटर, बैंगन की बुवाई की तैयारी एक साथ एक ही एक ही खेत में की जा रही है।

किसान इकराम चौधरी ने बताया कि उनके पास पांच बीघा से कम भूमि है। कई वर्ष से भूमि में अलग-अलग तरह की सब्जियां बोकर अधिक आय अर्जित कर रहे हैं। देवता मंदिर निकट खेत में सरसों के साथ पपीता के पौधे लगाए हैं, जो अब फल दे रहे हैं।

एक पपीते का वजन दो किलो से अधिक है। सरसों का उत्पादन तो मिलेगा ही, साथ में पपीते की फसल से आमदनी होगी। इस तरह से सह फसली खेती से छोटे किसानों को दोहरा लाभ हो रहा है। किसान प्रकाश सैनी ने लहसुन के साथ डोल पर धनिया , सौंफ की पैदावार कर रहे हैं।

हरा धनिया इस समय सब्जी मंडियों में महंगा बिक रहा है। इस समय उड़द, मसरी की एक साथ बुवाई होगी। किसान रमेश, संजीव, इनाम गन्ने की फसल में खरे की बुवाई कर रहे हैं। आने वाले समय में गन्ने के साथ खीरा तैयार हो जाएगा। इससे किसान को लाभ मिलेगा।

गांव नागल में सरसों की फसल में किसान संजीव द्वारा मधुमक्खी पालन के लिए बाक्स रखे गए हैं। सरसों के फूलों से मधुमक्खी शहद तैयार कर रही है। जिसकी बाजार में अधिक मांग है। सह फसली खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। कृषि विज्ञान के प्रभारी संदीप चौधरी ने बताया कि छोटी जोत के किसानों के लिए सह फसली लाभकारी है।
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