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Bindukhatta Protest: पूर्व सीएम हरीश रावत का ऐलान, बिंदुखत्ता को उजाड़ने से उनकी लाश से गुजरना होगा

deltin33 2026-2-19 10:26:54 views 1245
  

बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की मांग को लेकर बुधवार को जनता इंटर कालेज में आयोजित जनसभा में पोस्टर दिखाते पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत। साथ में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल। जागरण



जागरण संवाददाता, लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की मांग को लेकर आयोजित विशाल महारैली में वक्ताओं ने सरकार के खिलाफ जोरदार स्वर उठाए। हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में नेताओं ने स्पष्ट कहा कि अब यह संघर्ष निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और जब तक राजस्व गांव की अधिसूचना जारी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि बिंदुखत्ता की जनता दशकों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। राज्य गठन से पूर्व बसे लोगों को उजाड़ा नहीं जाएगा, इस संबंध में उनकी सरकार में मंत्रिमंडल स्तर पर निर्णय लिया गया था। चेतवानी दी कि यदि 25 अप्रैल तक सरकार ने मांगों पर कार्यवाही नहीं की तो देहरादून में बड़ा धरना आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता को उजाड़ने से पहले उनकी लाश के ऊपर से गुजरना होगा। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन सड़क से सदन तक गूंजेगा। बिंदुखत्ता के विकास और अधिकारों की लड़ाई को हर हाल में अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने कहा कि उनकी सरकार ने बिंदुखत्ता को नगर पालिका बनाया था। लेकिन भाजपा के बहकावे में आकर जनता के विरोध के बाद नगरपालिका को वापस लेना पड़ा। आरोप लगाया कि लंबे समय से सरकार बिंदुखत्ता वासियों के साथ छल कर रही है।

भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता बहादुर सिंह जंगी ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र अधिसूचना जारी नहीं हुई तो संघर्ष और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गांव की नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई है। वन अधिकार समिति के सदस्य उमेश भट्ट ने कहा कि बिन्दुखत्ता केवल वन अधिकार अधिनियम के तहत ही राजस्व गांव बन सकता है। लेकिन सरकार जटिल प्रक्रिया को अपनाकर इस मुद्दे को भटकाने का प्रयास कर रही है।
सभा में प्रमुख रूप से उपस्थित

सयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक इंद्र सिंह पनेरी, कुंदन सिंह मेहता, खिलाफ सिंह दानू, हरेंद्र बोरा, हेमवती नंदन दुर्गापाल, हरीश बिसौती, प्रमोद कलोनी, बीना जोशी, हरेंद्र बोरा, राजेंद्र सिंह खनवाल, संध्या डालाकोटी, कुंदन मेहता, पुष्कर सिंह दानू, भुवन जोशी, भरत नेगी, विमला राठौड़, उमेश भट्ट, प्रदीप बथ्याल, कैप्टन हीरा सिंह बिष्ट, प्रभात पाल, रमेश कुमार, पूरन परिहार, प्रकाश उत्तराखंडी, मोहन कुड़ाई, लक्ष्मण पाल, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा, प्रकाश मिश्रा, कैप्टन सुंदर सिंह खनका, मीना कपिल, राजेंद्र सिंह चौहान, किरन डालाकोटी, आनंद सिंह दानू, कैलाश पांडे, हरीश पनेरू, रमेश जोशी, कमला पति जोशी, बिशन दत्त जोशी, किशन बगरी समेत कई लोग मौजूद थे।

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