कैसे चलती है मुंबई लोकल सिर्फ टाइम टेबल नहीं हर मिनट के फैसलों पर रहती है नजर (फोटो सोर्स- राजेंद्र बी अक्लेकर)
राजेंद्र बी अक्लेकर, मुंबई। मुंबई की लाखों लोगों की जिंदगी लोकल ट्रेनों पर टिकी है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन ट्रेनों को सिर्फ टाइम टेबल नहीं, बल्कि हर मिनट लिए जाने वाले फैसले चलाते हैं। वेस्टर्न रेलवे के ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी स्क्रीन पर हर ट्रेन की मूवमेंट पर नजर रखते हैं।
चर्चगेट से विरार तक पीक आवर में करीब हर तीन मिनट में लोकल चलती है। सिस्टम सिग्नलिंग और ट्रैक्शन पावर सप्लाई से जुड़ा होता है, जिससे यह पता चलता है कि कौन सा सेक्शन खाली है, कौन सा प्लेटफॉर्म उपलब्ध है और कौन सी ट्रेन लेट है।
हर दिन सैकड़ों लोकल सेवाएं समय पर और सुरक्षित चलें, इसके लिए कंट्रोल रूम में लगातार फैसले लिए जाते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, किसी भी समय उपनगरीय सेक्शन में करीब 95 लोकल ट्रेनें चल रही होती हैं।
छोटी गड़बड़ी, बड़ा असर
अगर पीक आवर में एक ट्रेन भी बीच में रुक जाए तो कुछ ही मिनटों में दर्जनों सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए कंट्रोल रूम में तुरंत कार्रवाई की जाती है। भारी बारिश होने पर पानी भरे हिस्से से पहले ट्रेनों की रफ्तार कम कर दी जाती है। ट्रैक पर किसी हादसे या अतिक्रमण की स्थिति में ट्रेन को तब तक रोका जाता है जब तक स्थिति साफ न हो जाए।
ओवरहेड वायर में खराबी आने पर सिर्फ प्रभावित हिस्से की बिजली काटी जाती है, ताकि बाकी नेटवर्क चलता रहे। अगर कोई ट्रेन बीच में बंद हो जाए तो पीछे आने वाली ट्रेनों को रोका या डायवर्ट किया जाता है, ताकि पूरी लाइन प्रभावित न हो।
यात्रियों को जो दिखता है, उसके पीछे क्या होता है?
कई बार ट्रेन स्टेशन के बाहर रुक जाती है। ऐसे में प्लेटफॉर्म पर भीड़ को नियंत्रित किया जाता है। अगर कोई ट्रेन किसी स्टेशन पर नहीं रुकती, तो आगे चलकर सेवाओं के बीच दूरी को संतुलित किया जाता है।
फास्ट लोकल लेट होने पर ओवरटेक की व्यवस्था बदली जाती है। कभी-कभी अंधेरी या बोरीवली पर ट्रेन को शॉर्ट-टर्मिनेट किया जाता है, ताकि बाकी लाइन का टाइम टेबल सुरक्षित रहे। अगर अचानक कई ट्रेनें लेट हो जाएं, तो उन्हें अलग-अलग अंतर से चलाया जाता है, ताकि ट्रेनों की भीड़ (बंचिंग) न हो।
एआई से और बेहतर होगी व्यवस्था
पंकज सिंह डिविजनल रेलवे मैनेजर, वेस्टर्न रेलवे के अनुसार, आने वाले समय में इस सॉफ्टवेयर में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को जोड़ा जाएगा, जिससे सिस्टम और सुचारु बनेगा।
बांद्रा से बोरीवली के बीच 5वीं-6वीं लाइन का काम पूरा हो चुका है। अब माहिम से बांद्रा के बीच बची कड़ी पर काम की योजना है। इसके लिए हार्बर लाइन की ट्रेनों को बांद्रा से आगे अंधेरी-गोरेगांव तक कुछ समय के लिए बंद करना पड़ सकता है। पहले यह अवधि छह महीने बताई गई थी, जिसे घटाकर तीन महीने करने की योजना है। फिलहाल कुछ भी अंतिम नहीं है।
वेस्टर्न रेलवे ने नालासोपारा स्टेशन पर यात्रियों के लिए कतार व्यवस्था शुरू की है, ताकि चढ़ने-उतरने में आसानी हो। चर्चगेट में पहला कैरिज एंड वैगन कंट्रोल सेंटर भी विकसित किया गया है, जो चलते ट्रेन की स्थिति का आकलन करता है। साथ ही मानसून की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, ताकि बारिश में ट्रेनों का संचालन सुचारु रहे।
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