District Magistrate Review:प्रदर्शन बेहद लचर होने के कारण की गई कार्रवाई। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Farmer Registry Lapses: राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे राजस्व महाअभियान और फार्मर रजिस्ट्री की समीक्षा में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
इस पर सख्त रुख अपनाते हुए डीएम सुब्रत कुमार सेन ने पांच अंचल अधिकारियों (सीओ) से स्पष्टीकरण मांगा है, जबकि 22 किसान सलाहकार और 22 कृषि समन्वयकों का वेतन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। इसके अलावा 106 किसान सलाहकारों और कृषि समन्वयकों से भी स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
मंगलवार को हुई अंचलवार समीक्षा में पाया गया कि जिले के पांच अंचलों का प्रदर्शन बेहद लचर है। इसी आधार पर उक्त कार्रवाई की गई। डीएम ने स्पष्ट किया कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कार्य में सुधार नहीं होने पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व महाअभियान में कम रही ऑनलाइन इंट्री
समीक्षा में बताया गया कि जिले में राजस्व महाअभियान के तहत कुल 1 लाख 22 हजार 939 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से मात्र 73.67 प्रतिशत मामलों की ही ऑनलाइन इंट्री हो सकी है। डीएम ने कहा कि डिजिटल इंट्री अभियान की सफलता की कुंजी है, क्योंकि इससे पारदर्शिता बढ़ती है और निगरानी आसान होती है।
जांच में सामने आया कि कांटी, कुढ़नी, सरैया, कटरा और मुशहरी अंचल में ऑनलाइन इंट्री का प्रतिशत बेहद कम है। आंकड़ों के अनुसार, कांटी में सिर्फ 30 प्रतिशत, कुढ़नी में 49 प्रतिशत, सरैया में 56 प्रतिशत, कटरा में 60 प्रतिशत और मुशहरी में 64 प्रतिशत आवेदन ही ऑनलाइन दर्ज किए गए हैं। डीएम ने राजस्व वसूली में तेजी लाने और सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के कार्य को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
फार्मर रजिस्ट्री में भी लापरवाही उजागर
डीएम ने फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति की समीक्षा के दौरान पाया कि किसान पंजीकरण की रफ्तार अपेक्षित स्तर से काफी कम है। इसे गंभीरता से लेते हुए 22 किसान सलाहकार और 22 कृषि समन्वयकों का वेतन रोक दिया गया है। वहीं 106 अन्य कर्मियों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
डीएम ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को निर्देश दिया कि फार्मर रजिस्ट्री का कार्य मिशन मोड में किया जाए। हर किसान तक पहुंच बनाकर सक्रियता और तत्परता के साथ पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि तय समयसीमा में लक्ष्य पूरा नहीं होने पर जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई होगी। |