आरोपित के वानुआतु का नागरिक होने के दावे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ऐसा कोई देश नहीं (फाइल फोटो)
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक आरोपित की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को कहा कि वानुआतु जैसा कोई देश नहीं है। आरोपित ने दावा किया था कि वह प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश वानुआतु का नागरिक है।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी. अंजारिया की पीठ आरोपित की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उसे धोखाधड़ी के एक मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। उसके वकील ने पीठ को बताया कि वह लगभग एक वर्ष और तीन महीने से हिरासत में है।
पीठ ने पूछा, आप किस देश के नागरिक हैं? जब वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता वानुआतु का नागरिक है, तो पीठ ने पूछा, क्या आप कभी वहां गए हैं? इस पर वकील ने जवाब दिया कि नहीं, तो पीठ ने टिप्पणी की, ऐसा कोई देश नहीं है। हम उसी जैसे एक देश \“कैलासा\“ के बारे में भी जानते हैं।
गौरतलब है कि स्वयंभू बाबा नित्यानंद ने 2019 में \“यूनाइटेड स्टेट्स आफ कैलासा\“ नामक एक देश स्थापित करने का दावा किया था।
इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि आरोपित को पहले ही चार अन्य मामलों में जमानत मिल चुकी है। फिर पीठ ने बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील से पूछा, मुकदमे की सुनवाई पूरी करने में आपको कितना समय लगेगा?
राज्य के वकील ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई संभवत: छह से आठ महीने में पूरा हो जाएगा। इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। पीठ ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया। |
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