डुमरी थानेदार के खिलाफ धरना देते मृत प्रवासी मजदूर के स्वजन।
संस, जागरण, डुमरी (गिरिडीह)। झारखंड के गिरिडीह जिले के डुमरी दूधपनिया गांव के प्रवासी मजदूर विजय कुमार महतो की सऊदी अरब में गोली लगने से 23 अक्टूबर 2025 को मृत्यु हो गई थी। मृत्यु के करीब साढ़े चार महीने बाद शव सऊदी से रांची आ गया है लेकिन स्वजन ने लेने से इन्कार कर दिया है। शव रांची में पड़ा है।
स्वजन मुआवजा की मांग कर रहे हैं। साथ ही इस पूरे मामले में गिरिडीह के डुमरी के थानेदार की भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं। स्वजन ने मंगलवार को डुमरी अनुमंडल कार्यालय के सामने थानेदार के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना पर बैठ गए।
डुमरी के दूधपनिया गांव निवासी प्रवासी मजदूर विजय कुमार महतो की दुबई में हुई मौत के मामले में मुआवजा भुगतान से पहले शव मंगाने को लेकर विवाद गहरा गया है। डुमरी थाना प्रभारी पर कथित अनुचित भूमिका निभाने का आरोप लगाते हुए मृतक के स्वजन व पंचायत के दर्जनों महिला-पुरुषों ने मंगलवार को अनुमंडल कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
धरना का नेतृत्व पूर्व मुखिया सह विधायक प्रतिनिधि रामप्रसाद महतो रामू, मृतक के पिता सूर्यनारायण महतो, चाचा लोकनाथ महतो व ससुर चिंतामन महतो कर रहे हैं। शाम तक प्रशासन की ओर से वार्ता की कोई पहल नहीं हुई। प्रदर्शनकारी थाना प्रभारी के खिलाफ जांच व कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मुआवजा प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप
धरना में जिप सदस्य सुनीता कुमारी, पूर्व प्रमुख यशोदा देवी, मुखिया जागेश्वर महतो, भाकपा माले प्रखंड सचिव नागेश्वर महतो, झाएकिमयू के रविंद्र कुमार, प्रवासी मजदूरों के हित में काम करने वाले सिकंदर अली व मोहन महतो समेत अन्य लोगों ने नैतिक समर्थन दिया।
बताया गया कि विजय कुमार महतो का शव झारखंड लाने में करीब साढ़े तीन माह लग गए और वर्तमान में शव रांची में है। मृतक की पत्नी बसंती देवी ने आरोप लगाया कि दुबई से शव लाने और कंपनी से मिलने वाली वैधानिक मुआवजा राशि की प्रक्रिया विधिसम्मत रूप से चल रही थी, तभी थाना प्रभारी ने कथित रूप से धोखाधड़ी कर अपने स्तर से पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार करवा लिया। उनका कहना है कि उन्होंने या उनके परिवार के किसी सदस्य ने ऐसी कोई विधिक सहमति नहीं दी।
स्वजन ने उठाए सवाल
मृतक के पिता सूर्यनारायण महतो ने कहा कि घटना के बाद से ही परिवार पर शव लाने के लिए एनओसी और पावर ऑफ अटॉर्नी देने का दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब परिवार ने पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं दी, तो शव भारत कैसे लाया गया।
बसंती देवी ने आरोप लगाया कि एक चौकीदार और अन्य व्यक्ति उनके पास आए और सफेद कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए। स्वजन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मुआवजा प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पुनः शुरू कराने की मांग की है।
पुलिस ने आरोपों को बताया निराधार
थाना प्रभारी प्रणित पटेल ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि पावर ऑफ अटॉर्नी पर मृतक की पत्नी के हस्ताक्षर हैं और इसके गवाह भी मौजूद हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस तरह के आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं।
वहीं डुमरी एसडीपीओ सुमित कुमार ने कहा कि घटना के बाद से पुलिस प्रशासन मृतक के स्वजन के साथ खड़ा है और हर संभव सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शव रांची पहुंच चुका है और आगे की प्रक्रिया में पुलिस परिवार के निर्णय के अनुसार सहयोग करेगी। |
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