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इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
जागरण संवाददात, मुजफ्फरपुर। commercial vehicle testing : व्यावसायिक वाहन चालकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। मुजफ्फरपुर से वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए वैशाली जाना पड़ रहा है। लेकिन रास्ते में ही चालकों के मन में जुर्माने का डर सता रहा है।
कागजात पूरे होने के बावजूद जांच के दौरान चालान कटने की आशंका उन्हें परेशान कर रही है। एक ओर नियमों का पालन अनिवार्य है, तो दूसरी ओर लंबी दूरी, समय की बर्बादी और संभावित आर्थिक नुकसान ने परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
फिटनेस बनवाने में जुर्माने का सता रहा डर
कर्मशियल वाहनों के फिटनेस बनवाना परेशानी का सबब बन गया है। वैशाली जिले में आटोमेटिड टेस्टिंग स्टेशन जाकर फिटनेस बनवाने में कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ई-रिक्शा, आटो, बस, ट्रक, पिकअप, ट्रैक्टर समेत सभी कर्मशियल वाहनों का फिटनेस बनवाने की राहें मुश्किल हो गई है। सबसे बड़ी त्रासदी ई-रिक्शा एवं आटो की है। एक जिले से दूसरे जिला जाकर फिटनेस बनवाना सजा बन गया है।
चालकों ने कहा कि ई-रिक्शा व आटो दूसरे जिला में ले जाने पर पुलिस जुर्माना करती है। मुजफ्फरपुर से वैशाली जाने के रास्ते में कई थाना आता है। ऐसे में जुर्माना होना तय है। इसके साथ ही ई-रिक्शा लेकर वैशाली जाना तकनीकी रुप से मुश्किल है।
ई-रिक्शा की बैट्री अगर नई हो तब भी वैशाली जाकर वापस आना संभव नहीं। बीच रास्ते में ही बैट्री डिस्चार्ज हो जाएगा। मुजफ्फरपुर आटो रिक्शा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष एआर अन्नु एवं महासचिव मो. इलियास इलू ने कहा कि यह आदेश अव्यवहारिक है।
आटो व ईरिक्शा का वैशाली जिला ले जाकर फिटनेस बनवाना काफी मुश्किल है। कम से कम छोटे वाहनो ंके लिए जिले में ही फिटनेस बनवाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
इधर, बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के जिलाध्यक्ष मुकेश शर्मा ने कहा कि वैशाली में लंबी कतार हो रही है। नई व्यवस्था से ट्रांसपोटर्स आक्रोशित है। जिले में ही इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। जिले के करीब एक लाख 29 हजार से अधिक कर्मशियल वाहन मालिकों के लिए यह त्रासदी बन गई है। |
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