शिमला स्थित विधानसभा परिसर में संविधान की कॉपी लेकर मीडिया से बात करते डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री।
राज्य ब्यूरो, शिमला। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर जब भी दिल्ली जाते हैं, तो उनकी कोशिश हिमाचल के लिए केंद्र से रुकी हुई वित्तीय मदद को और रुकवाने की होती है। राजस्व घाटा अनुदान पर प्रदेश विधानसभा में चल रही चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने भाजपा से हिमाचल के लिए आरडीजी जारी रखने पर राज्य सरकार को समर्थन देने पर अपना स्टैंड साफ करने को कहा।
उन्होंने दावा किया कि जब वह केंद्रीय मंत्रियों से मिलते हैं, तो वे बताते हैं कि वे हिमाचल को पैसा देने के लिए तैयार थे, लेकिन नेता प्रतिपक्ष गुस्सा हो जाएंगे।
हमें भी संरक्षण प्राप्त
मुकेश अग्निहोत्री संविधान की प्रति लेकर पहुंचे और बताया कि हमें भी इससे संरक्षण प्राप्त है। ब्रिटिशकाल में असम सहित कई राज्यों को मदद का उल्लेख किया गया था, उस समय हिमाचल अस्तित्व में नहीं था, इसलिए हमारा जिक्र नहीं रहा।
नेता प्रतिपक्ष के बयान खोल रहे भाजपा की पोल
अग्निहोत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जनता में जाकर कह रहे हैं कि विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हो जाओ, क्योंकि हिमाचल की आरडीजी रोक दी गई है। उनके इस कदम ने भाजपा की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही रही है। पहले जीएसटी मुआवजा रोक दिया गया और अब आरडीजी बंद करने की सिफारिश की गई है, जिसका कई छोटे राज्यों, खासकर हिमाचल पर बुरा असर पड़ा है।
प्रधानमंत्री दखल देकर मदद करें
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को दखल देकर हिमाचल की मदद करनी चाहिए, क्योंकि उनके पास केंद्र के खजाने से भी ज़्यादा देने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि बड़े राज्य आरडीजी को बंद करवाने में कामयाब रहे हैं, लेकिन हिमाचल जैसे राज्यों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
यह हिमाचल के अधिकारों की रक्षा का सवाल
अब समय आ गया है कि हम सभी को एक साथ खड़े होना चाहिए, ऐसे समय में जब हिमाचल को 55,000 करोड़ रुपये से वंचित किया जा रहा है, क्योंकि सरकारें आती-जाती रहेंगी। यह हिमाचल के अधिकारों की रक्षा का सवाल है, जिसके लिए हम सभी को छोटी-मोटी राजनीतिक सोच से ऊपर उठना होगा।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नेता प्रतिपक्ष दिशाहीन हो गए हैं और जब भी हिमाचल के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई प्रस्ताव पारित होता है, तो वे वाकआउट कर देते हैं। यहां तक कि जब विधानसभा ने 2023 की मानसून आपदा के लिए केंद्र से वित्तीय मदद मांगने का प्रस्ताव पारित किया था, तब भी भाजपा विधायक सदन से बाहर चले गए थे, जिसे राज्य के लोगों ने देखा।
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