क्या ये शख्स करेगी एयर इंडिया की गड़बड़ियां दूर?
नई दिल्ली। टाटा संस ने अपने एविएशन बिजनेस (Tata Aviation Sector) के लिए एक नए व्यक्ति को हायर किया है। कंपनी ने पूर्व सिविल एविएशन सेक्रेटरी प्रदीप सिंह खरोला को एडवाइजर के तौर पर शामिल किया है। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रुप एयर इंडिया को पटरी पर लाने की कोशिशें कर रहा है। 1985 बैच के इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज ऑफिसर खरोला से उम्मीद है कि वे एयर इंडिया की सरकार के साथ बातचीत को लीड करने में अहम भूमिका निभाएंगे, क्योंकि एयरलाइन को कड़ी रेगुलेटरी जांच और टॉप पर लीडरशिप में बदलाव का सामना करना पड़ रहा है।
एयर इंडिया पर रखी जा रही कड़ी नजर
खरोला खुद फरवरी 2019 से सितंबर 2021 तक सिविल एविएशन सेक्रेटरी रहे। उन्होंने एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन प्रोसेस को लीड किया था, जिसके नतीजे में जनवरी 2022 में टाटा ग्रुप ने एयरलाइन का टेकओवर कर लिया था।
वे एयर इंडिया के चेयरमैन के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनका अपॉइंटमेंट ऐसे वक्त पर हो रहा है, जब पिछले साल बोइंग 787 एयरक्राफ्ट के क्रैश होने के बाद से एयर इंडिया के ऑपरेशन्स पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उस हादसे में 260 लोग मारे गए थे।
एयर इंडिया को मिले हैं 84 नोटिस
पिछले दो सालों में सिविल एविएशन रेगुलेटर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एयर इंडिया को 84 कारण बताओ नोटिस भेजे हैं, जबकि इसकी लो-कॉस्ट सब्सिडियरी एयर इंडिया एक्सप्रेस को 65 नोटिस मिले हैं।
इसके मुकाबले इंडिगो, जिसका फ्लीट साइज एयर इंडिया से लगभग दोगुना है, को 98 नोटिस मिले। पिछले हफ्ते भी, DGCA ने एयर इंडिया पर बिना एयरवर्थनेस परमिट के आठ बार एयरक्राफ्ट उड़ाने के लिए पेनल्टी लगाई। ये एयर इंडिया के ऑपरेशंस में खामियों का बड़ा संकेत है।
किसने और क्यों चुना खरोला को?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार खरोला को टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने चुना है। वह क्रैश के बाद एयरलाइन के कामकाज से करीब से जुड़े रहे हैं और सरकार के साथ सेंसिटिव बातचीत और सेफ्टी रिव्यू जैसे जरूरी एरिया में भी करीब से जुड़े रहे हैं।
एविएशन सेक्टर में कई चुनौतियां
एविएशन एक बहुत अधिक रेगुलेटेड बिजनेस है, और एयरलाइंस अक्सर कई अहम चीजों के लिए सरकारी मंजूरी पर निर्भर रहती हैं। जैसे कि, एयर इंडिया सरकार से चाहती है कि उसे चीनी एयरस्पेस से होकर जाने दिया जाए, ताकि पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने पर बैन लगने से उसे हो रहे फाइनेंशियल नुकसान को कम किया जा सके।
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