सांकेतिक तस्वीर।
संवाद सहयोगी, जागरण, वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति का गठन कर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्ष बनाया। समिति को एक वर्ष का कार्यकाल देकर मंदिर की व्यवस्था में सुधार, भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी।
अभी दो निर्णय पर ही अमल हुआ, एक वीआइपी पर्ची बंद करने और दूसरे रेलिंग लगाने का। लेकिन अभी रेलिंग भी अधूरी लग पाई है। मंगलवार को समिति की 11वीं बैठक है, इसमें अधूरे निर्णयों का मुद्दा तो उठेगा ही, ठाकुर जी को फिलहाल मंदिर के जगमोहन में विराजमान करने पर भी सहमति बन सकती है।
दर्शन के समय में बदलाव, दर्शन का सीधा प्रसारण शुरू न होने का भी उठेगा मुद्दा
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने अगस्त में कार्यभार संभालने के बाद पहली बैठक में मंदिर में भीड़ नियंत्रण के लिए कई योजनाओं पर अमल करने का निर्णय लिया। इनमें मंदिर के अंदर व चबूतरे से अतिक्रमण हटाने, प्रांगण में सेवायतों की संख्या सीमित करने, वीआईपी व्यवस्था खत्म करने, रेलिंग प्रक्रिया के तहत दर्शन कराने, ठाकुरजी के दर्शन समय में बदलाव, दर्शन का सीधा प्रसारण शुरू करने, ठाकुरजी के लिए प्रतिदिन भोग की प्रायोजित व्यवस्था करने की योजना बनाई थी। छह महीने गुजरने के बाद वीआइपी कटहरा में रसीद काटकर दर्शन कराने की व्यवस्था खत्म हो सकी है।
समिति सदस्य की 18 फरवरी से सेवा
मंदिर प्रांगण में स्टील रेलिंग लगाई गई हैं। अधिकतर योजनाएं समिति धरातल पर नहीं उतार सकी है। मंगलवार शाम साढ़े चार बजे वृंदावन के शहीद लक्ष्मण सिंह स्मारक के सभागार में आयोजित समिति की बैठक में यह मुद्दे भी गूंजेंगे।
जगमोहन में ठाकुर जी को विराजित करने का रखेंगे प्रस्ताव
समिति के एक सदस्य श्रीवर्धन गोस्वामी की 18 फरवरी से दो मार्च तक मंदिर में ठाकुर जी की सेवा शुरू हो रही है। ऐसे में वह श्रद्धालुओं को अच्छे से दर्शन कराने को वह ठाकुर जी को अपनी सेवा के दौरान जगमोहन में विराजमान कराना चाहते हैं। वह मंगलवार को प्रबंधन समिति की बैठक में यह मुद्दा भी रखेंगे।
गोस्वामी कहते हैं कि जगमोहन में विराजे ठाकुर जी के श्रद्धालुओं को अच्छे से दर्शन हो जाते हैं। अब तक ठाकुरजी होली के पांच दिनों के अलावा हरियाली तीज व फूलबंगला के दिनों में ही जगमोहन में विराजकर भक्तों को दर्शन देते थे। बाकी दिनों में गर्भगृह में ही आराध्य के दर्शन होते हैं। |