चुनाव आयोग ने सात बंगाल अधिकारियों को निलंबित किया
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही चुनाव आयोग ने सोमवार को सख्त रुख दिखाते हुए मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण ( एसआईआर) में शामिल राज्य के सात जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इन सभी पर एसआईआर के दौरान अपनी जिम्मेदारियों का ठीक से निर्वहन न करने और गंभीर गड़बडि़यों मे शामिल होने जैसे आरोप है।
आयोग ने पहले राज्य के मुख्य सचिव को इनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था, लेकिन जब राज्य सरकार ने इसे लेकर ढुलमुल रवैया दिखाया तो आयोग ने अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह सख्त कदम उठाया है।
चुनाव आयोग ने सात बंगाल अधिकारियों को निलंबित किया
आयोग ने राज्य के जिन सात अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई की है, उनमें एईआरओ (असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) स्तर के अधिकारी शामिल है। आयोग ने यह कार्रवाई लोक प्रतिनिधित्व कानून-1950 ( आर पी एक्ट-1950) के सेक्शन 13- सीसी के तहत मिली शक्तियों के तहत किया है।
वैसे भी एसआईआर सहित चुनाव से जुड़ी गतिविधियों को ठीक तरीके से संचालित करने के लिए चुनाव आयोग राज्य सरकार से उनके अधिकारियों व कर्मचारियों को लेती है। चुनाव कार्य के दौरान वह आयोग की प्रतिनियुक्ति पर रहते है।
आयोग ने इस दौरान जिन अधिकारियों को निलंबित किया है, उनमें समसेरगंज विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ डा सेफौर रहमान, फरक्का विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ नीतिश दास, मयनागुड़ी विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ दलिया रे चौधरी, सुती विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ एसके मुर्शिद आलम, कैनिंग पुरबो विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ सत्यजीत दास और जयदीप कुंडू व डेबरा विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ देबाशीष विश्वास शामिल है।
आयोग के मुताबिक इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने अपने जिम्मेदारी का ठीक ढंग से निर्वहन नहीं किया। साथ ही एसआइआर के दौरान इन्होंने अपने गोपनीय लागिन व पासवर्ड को दूसरे लोगों को दे दिया था। इसके चलते एसआइआर के दौरान बड़े स्तर पर गड़बडि़यां की गई।
आयोग के अल्टीमेटम का आज खत्म हो रही है अवधि भी
आयोग ने इससे पहले राज्य से मुख्य सचिव को बीएलओ को मानदेय देने सहित कई अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के दिए गए अपने पिछले निर्देशों पर तत्काल अमल के निर्देश भी थे। साथ ही मुख्य सचिव से 17 फरवरी को शाम साढ़े पांच बजे तक इसके अमल की रिपोर्ट भी देने को कहा है।
इसकी अवधि मंगलवार को खत्म हो रही है। माना जा रहा है कि यदि मुख्य सचिव ने तय समय में आयोग के निर्देशों पर अमल नहीं किया तो चुनाव की घोषणा के बाद आयोग इसे लेकर भी अहम फैसला ले सकता है। |
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