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अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का नया वेरियंट, बचाव के लिए वैज्ञानिकों ने किया मंथन

LHC0088 3 hour(s) ago views 165
  

प्रतीकात्मक फोटो  



जागरण संवाददाता, बागपत। देशभर के विज्ञानियों ने चौ. चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान बागपत में विदेशी बीमारियों के वायरस से पशु-पक्षियों के बचाव को मंथन किया। चुनौतियों से निपटने का खाका खींचा गया।

अफ्रीकन स्वाइन फीवर, एवियन एवियन इन्फ्लूएंजा तथा क्लासिकल स्वाइन फीवर समेत कई बीमारियों के नए वायरस की दवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए बागपत की संस्थान की सभी लैब उपयुक्त मिली।
भारत सरकार के अपर सचिव पशुपालन एवं डेयरी विभाग रामा शंकर सिन्हा के नेतृत्व में चौ. चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान बागपत में विज्ञानियों ने एवियन इन्फ्लुएंजा यानी बर्ड फलू, अफ्रीकी स्वाइन फीवर व क्लासिकल स्वाइन फीवर के साथ ही खुरपका-मुंहपका के नए वायरसों से पशु-पक्षियों को बचाव के लिए मंथन कर रणनीति बनाई।

इन बीमारियों की दवाइयों की गुणवत्ता की जांच बागपत में होगी। भारत सरकार के पशुपालन आयुक्त डा. नवीना बी. महेश्वरप्पा, पशु पालन आयुक्त नेतृत्व में राष्ट्रीय खुरपका-मुंहपका रोग संस्थान भुवनेश्वर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निदेशक डा. आरपी सिंह, डा. राज कुमार सिंह आदि विज्ञानियों ने राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान की प्रयोगशालाओं की क्षमता परखा जो नए वायरस की रोकथाम को दवाइयों की गुणवत्ताकी जांचने के लिए उपयुक्त मिली।

राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान के संयुक्त आयुक्त डा. अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि ने देशभर के विज्ञानियों ने पशु-पक्षियों की बीमारियों तथा बचाव के लिए किसानों को टकाकरण को जागरूकता पैदा की जाए। वैक्सीन की प्रभावकारिता तथा गुणवत्ता बढ़ाने तथा संक्रमित पशुओं का अंधाधुंध वध को कम करने पर जोर दिया।

अंतरराष्ट्रीय मानक अनुसार आंशिक या चयनात्मक वध पर ध्यान केंद्रित किया जाए। दूध परीक्षण, मूत्र परीक्षण, मल परीक्षण जैसे त्वरित परीक्षण विधियों को विकसित करने और बीमारियों और उनके प्रकारों की वास्तविक समय की निगरानी और जानकारी के लिए पोर्टल विकसित करने पर सहमति बनी।
इन विज्ञानियों ने किया मंथन

विज्ञानी डा. सोहिनी डे, डा. सी. मदन मोहन, विभागाध्यक्ष जैव प्रौद्योगिकी प्रभाग आईवीआरआई बरेली, डा. एसएस. पाटिल प्रधान विज्ञानी राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान, डा. मधुसूदन होसमानी प्रधान विज्ञानी आईवीआरआई बेंगलुरु, भाकृअनुप राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भोपाल तथा डा. अनुभूति गोयल विज्ञज्ञनी भारतीय फार्माकोपिया आयोग गाजियाबाद ने बीमारियों व बचाव को दवाओं पर विचार व्यक्त किए। कहा कि नए वायरसों की आमद से रोज चुनोतियां बढ़ रही हैं लेकिन इनसे निपटने के लिए भारत विज्ञानी सक्षम हैं।


भविष्य में संस्थान का बढ़ेगा और दर्जा

भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आरजी डा. बांबल, डा. विजय कुमार तेवतियां, संयुक्त आयुक्त, डा. संदीप कुमार सिंह, डा. विक्रम सिंह डॉ. अरुणा शर्मा ने चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संथान बागपत में व्यवस्था सही मिलने पर संकेत दिया कि भविष्य में इसका दर्जा और बढ़ेगा।


42 दवाओं की गुणवत्ता की होगी जांच

अब वेटनरी वैक्सीन गुणवत्ता की जांच के लिए दक्षिण एशिया के इकलौते चौ. चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान बागपत का दायरा पंद्रह दिन पहले ही बढ़ा। अब यहां की लैब में छह के बजाय फाउल पाक्स, कैनाइन डिस्टेंपर, पीपीआर, ब्रुसेलोसिस, हैमरेजिक सेप्टीसीमिया और टेटनस समेत 42 रोगों की वैक्सीन की जांच होगी।
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