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शेयर मार्केट में आपने भी सुने होंगे वीकली और मंथली एक्सपायरी शब्द, मगर क्या होता है इनका मतलब? आसान शब्दों में समझें

Chikheang 5 hour(s) ago views 825
  

क्या होता है वीकली और मंथली एक्सपायरी का मतलब?



नई दिल्ली। बीते कुछ समय में भारतीय शेयर बाजार में तेजी से बदलाव हुए हैं, जो अब भी जारी हैं। निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है, जिसके साथ ही ट्रेडिंग के नए ऑप्शन और प्रोडक्ट्स भी पेश किए जा रहे हैं। जो प्रोडक्ट्स आज के समय में लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं, उनमें से एक है फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) कॉन्ट्रैक्ट्स की \“एक्सपायरी\“। अक्सर आपने भी ये शब्द सुने होंगे कि आज वीकली या मंथली एक्सपायरी है। लेकिन इसका मतलब क्या होता है और यह निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है? आइए बताते हैं।
क्या होते हैं फ्यूचर्स और ऑप्शंस?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस ऐसे डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट होते हैं, जिनकी एक डेडलाइन फिक्स होती है। इसी डेडलाइन वाली तारीख को एक्सपायरी डेट कहते हैं। एक्सपायरी के बाद वह कॉन्ट्रैक्ट वैलिड नहीं रहता।
इस बात को एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए यदि आपने निफ्टी का कोई ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट खरीदा, जिसकी एक्सपायरी एक फिक्स दिन है, तो उस दिन के बाद वह खुद समाप्त हो जाएगा। निवेशक या तो एक्सपायरी से पहले अपनी पोजीशन बंद कर सकते हैं या फिर एक्सपायरी के दिन उसका सेटलमेंट होता है।
पहले केवल मंथली एक्सपायरी होती थी

पहले सिर्फ मंथली एक्सपायरी होती थी। तब हर महीने के आखिरी गुरुवार को सभी एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स खत्म हो जाते थे। इससे निवेशकों को फायदा ये था कि वे लंबी अवधि की रणनीति बना सकते थे। मगर बढ़ती ट्रेडिंग एक्टिविटीज और निवेशकों की मांग को देखते हुए वीकली एक्सपायरी की शुरुआत हुई।
2016 में सबसे पहले एनएसई ने बैंक निफ्टी का वीकली ऑप्शंस पेश किया, जिसके बाद निफ्टी और कुछ अन्य स्टॉक्स में भी यह सुविधा शुरू की गई।
वीकली एक्सपायरी का मतलब क्या?

वीकली एक्सपायरी का मतलब है कि हर सप्ताह एक तय दिन कॉन्ट्रैक्ट्स समाप्त होंगे। पहले यह दिन आमतौर पर गुरुवार होता था। हालांकि, कुछ समय पहले एक बड़े बदलाव के तहत एनएसई ने सभी एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी गुरुवार से बदलकर मंगलवार कर दी।
वीकली और मंथली एक्सपायरी में क्या है अंतर?

वीकली और मंथली एक्सपायरी में कई बड़े अंतर हैं। वीकली एक्सपायरी कम समय की होती है, इसलिए इसमें वोलैटिलिटी (अस्थिरता) यानी उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिलता है। यह शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए अवसर पैदा करती है, जो तेजी से मुनाफा कमाने की रणनीति अपनाते हैं।
दूसरी ओर, मंथली एक्सपायरी ज्यादा स्थिर होती है और लंबी अवधि की पोजीशन लेने वाले निवेशकों के लिए ज्यादा बेहतर मानी जाती है। दोनों ही प्रकार के कॉन्ट्रैक्ट्स में निफ्टी और बैंक निफ्टी जैसे इंडेक्स में अच्छी लिक्विडिटी उपलब्ध रहती है।
क्या कहते हैं बाजार के जानकार?

बाजार के जानकार कहते हैं कि एक्सपायरी का दिन बाजार में खास महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन अक्सर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। यह उतार-चढ़ाव ट्रेडर्स के लिए कमाई का मौका बना सकता है। मगर इसके जोखिम भी अधिक रहते हैं।
बताया जाता है कि बड़े निवेशक और इंस्टीट्यूशन अपने पोर्टफोलियो को बाजार जोखिम से बचाने के लिए फ्यूचर्स और ऑप्शंस का इस्तेमाल हेजिंग के तौर पर करते हैं। ऐसे में वीकली और मंथली दोनों एक्सपायरी रणनीति का अहम हिस्सा होती हैं।
रिटेल निवेशकों के लिए सलाह?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रिटेल निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि एक्सपायरी के दौरान बाजार में तेजी से बदलाव हो सकता है। बिना समझे ट्रेडिंग करने पर नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए नए निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे पहले एक्सपायरी की प्रकृति, जोखिम और रणनीतियों को समझें, फिर सीमित पूंजी के साथ अभ्यास करें।

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“शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।“

(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
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