Bengaluru Mom Insta Video Viral: आजकल के भागमभाग भरी जिंदगी में बड़े शहरों में रह रहे लोगों को अपने बच्चों को पालने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। मेट्रो सीटीज में इसका कल्चर तो बहुत बढ़ गया है। अब समय ऐसा आ गया है कि हम अपने ऑफिस और काम में इतना व्यस्त हो गए हैं कि अपने बच्चों की परवरिश के लिए आया (नैनी) रखनी पड़ रही है। अब आप सोचिए कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में रहने वाले परिवार को अपने बच्चों को पालने में कितने पैसे खर्च करने पड़ते होंगे। बेंगलुरू में रहने वाली महिला ने एक हैरान कर देने वाली खुलासा किया है।
महिला ने किया हैरान कर देने वाली खुलासा
बेंगलुरु की एक मां, परवीन चौधरी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर बताया कि वह अपने दो छोटे बेटों की देखभाल के लिए दो नैनी रखती हैं। उनके बच्चे तीन और चार साल के हैं। उनकी पोस्ट के बाद इस विषय पर काफी चर्चा शुरू हो गई। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में परवीन ने बताया कि पहली नैनी को हर महीने 32,000 रुपये दिए जाते हैं। वह खाना बनाती है, घर की सफाई करती है और बच्चों की देखभाल करती है। जरूरत पड़ने पर वह रात में भी रुकती है। दूसरी नैनी को 14,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं। उसका काम मुख्य नैनी की मदद करना और जरूरत पड़ने पर उसकी जगह काम संभालना है। इस तरह बच्चों की देखभाल पर हर महीने कुल 46,000 रुपये खर्च होते हैं, जिस पर लोगों ने अलग-अलग राय दी है।
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
परवीन चौधरी ने बताया कि इस मदद की वजह से उनके बच्चे खुद को सेफ महसूस करते हैं। साथ ही, उन्हें भी बिना चिंता के काम करने या बाहर जाने की आज़ादी मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि एक नैनी अपनी कमाई से अपने गांव में रहने वाले अपने तीन बच्चों का खर्च उठाती है। परवीन ने कहा, “मेरी एक नैनी के गांव में तीन बच्चे हैं, जिनकी पढ़ाई और बाकी खर्च वह अपनी सैलरी से संभालती है। ये महिलाएं अपने परिवार के लिए बेहतर जिंदगी देने के लिए मेहनत करती हैं और अपने संसाधनों का सही इस्तेमाल करती हैं।”
परवीन चौधरी ने कहा कि उनके लिए यह व्यवस्था सिर्फ पैसों का लेन-देन नहीं है। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, “मेरे लिए नैनी रखना सिर्फ इतना नहीं है कि मैं कुछ घंटों के बदले पैसे दूं और वे सेवा दें। वे मेरे परिवार का हिस्सा हैं। मेरे बच्चों को दो स्नेह देने वाली आंटियां मिली हैं।” उन्होंने आगे कहा कि उनके लिए ईमानदारी और भरोसा सबसे अहम हैं। जब उन्हें सही लोग मिलते हैं, तो वह उन पर भरोसा करती हैं और हर छोटी बात पर निगरानी नहीं रखतीं। परवीन ने यह भी कहा कि उनकी हाउस हेल्प ने हमेशा उम्मीद से ज्यादा साथ दिया है। “उन्होंने मुझे काम करने, बाहर जाने और बच्चों की देखभाल संतुलित तरीके से करने में मदद की है, तब भी जब मुझे खुद मुश्किल महसूस होती है।” |