प्रशासन के दावों की खुली पोल
संवाद सूत्र, शाहपुर(आरा)। प्रखंड क्षेत्र के जवइनिया गांव के कटाव पीड़ितों के पुनर्वास की प्रक्रिया प्रशासन द्वारा अंचल के बिलौटी गांव के दक्षिण आवंटित भूमि पर शुरू कर दी गई है। हालांकि पुनर्वास स्थल पर अब तक बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिससे पीड़ित परिवारों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जवइनिया गांव के 70 कटाव पीड़ित परिवारों को तीन-तीन डिसमिल जमीन का पर्चा दिया गया है। घर नदी कटाव में विलीन होने के बाद प्रत्येक परिवार को एक लाख बीस हजार रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की जा चुकी है।
प्रशासन द्वारा केवल एक-एक पॉलीथिन शीट उपलब्ध
बावजूद इसके पुनर्वास स्थल की स्थिति बदहाल है। पीड़ितों का कहना है कि जिस जमीन पर बसाया जा रहा है, वह करीब 7 से 8 फीट गड्ढानुमा है, जिसे समतल किए बिना ही रहने के लिए कहा जा रहा है।
फिलहाल प्रशासन द्वारा केवल एक-एक पॉलीथिन शीट उपलब्ध कराई गई है। करीब दर्जन भर परिवार उसी के सहारे अस्थायी झोपड़ी बनाकर दिन में रहते रहे हैं और शाम ढलने के पहले जवइनिया लौट जाते हैं।
न तो पेयजल की सुविधा और न ही बिजली
कटाव पीड़ित झकड़ बिंद व सोनमती बिंद ने बताया कि पुनर्वास स्थल पर न तो पेयजल की सुविधा है और न ही बिजली की व्यवस्था। पीने के पानी के लिए करीब एक किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता है। वहां तक पहुंचने के लिए उबड़-खाबड़ कच्चा रास्ता है, जो बरसात में और भी दिक्कत भरा हो जाता है।
सबसे गंभीर बात यह है कि आवंटित जमीन के ऊपर से हाई टेंशन बिजली का तार गुजर रहा है। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। वीरान स्थान होने के कारण सुरक्षा को लेकर भी परिवारों में चिंता है। लोगों का कहना है कि जब तक पानी, बिजली और सड़क की समुचित व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक वहां स्थायी रूप से रहना संभव नहीं है।
पीड़ितों की मांग, बसाने से पहले दें बिजली-पानी
पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा बार-बार इसी स्थल पर बसने के लिए कहा जा रहा है, जबकि बिजली-पानी जैसी मूलभूत जरूरतें अब तक पूरी नहीं की गई है।
इधर, अंचलाधिकारी आनंद प्रकाश ने बताया कि कटाव पीड़ितों के पुनर्वास का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही उक्त स्थान तक सड़क व पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही जिन लाभुकों की जमीन हाई टेंशन तार के नीचे आ रही है, उन्हें बगल में वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। |