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मेरठ में बैट लेने पहुंचे अफगानिस्तान के कप्तान राशिद खान, बताई अपने मन की बात

LHC0088 6 hour(s) ago views 884
  

अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान राशिद खान को बल्ला दिखाते एसजी के मार्केटिंग निदेशक पारस आनंद। सौ. एसजी



जागरण संवाददाता, मेरठ। अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी बालिंग आलराउंडर और टी-20 टीम के कप्तान राशिद खान ने कहा कि उनका पहला लक्ष्य अपने देश के लिए आइसीसी ट्राफी जीतना है। दूसरा महत्वपूर्ण लक्ष्य अफगानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच का आयोजन कराना है, जिससे देश में क्रिकेट को और अधिक बढ़ाने में मदद मिलेगी।

  

मेरठ में एसजी से बल्ला व अन्य क्रिकेट उपकरण लेने पहुंचे राशिद खान ने अपनी क्रिकेट यात्रा को साझा करते हुए बताया कि छोटी में बड़े भाइयों को टेप बाल से क्रिकेट खेलते देख उन्होंने भी खेलना शुरू किया था।
भाइयों ने किया प्रोत्साहित

राशिद खान ने बताया कि भाइयों ने उनके गेंदबाजी हुनर को देख खेलने के लिए प्रोत्साहित किया लेकिन अभिभावकों की ओर से क्रिकेट खेलने की अनुमति नहीं थी। वह उन्हें पढ़ लिखकर डाक्टर बनने को प्रेरित करते थे। इसीलिए राशिद अभिभावकों से छिपकर क्रिकेट खेलने जाते थे। करीब 16-17 वर्ष की आयु में अंडर-19 के लिए ट्रायल देने गए तो वहां टीम में चुन लिए गए।

टीम में चयनित होने के बाद माता-पिता को बताया। पिता फिर भी क्रिकेट खेलने के पक्ष में नहीं थे लेकिन माता ने सहयोग किया। उसके बाद अंडर-19 विश्व कप में अफगानिस्तान की ओर से खेलने का मौका मिला। अंडर-19 विश्वकप खेलने के दौरान की यादों पर राशिद खान ने बताया कि वहां ऋषभ पंत के छक्के हमेशा याद रहे। उस समय ऋषभ एसजी के बल्ले से ही खेल रहे थे। तभी से वह भी एसजी का बल्ला लेकर खेलने लगे।
पहली बाल में चौका लगा तो हिम्मत टूटी, पहले विकेट ने जोश बढ़ाया

राशिद खान ने बताया कि टी-20 विश्वकप में अच्छा प्रदर्शन करने पर आइपीएल में नाम आ गया। बताया कि पहली बार मैच खेलने गए तो इतने दर्शक और शोर देखकर हाथ-पैर फूल गए। लगा कि किसी गलत जगह आ गया। उसी समय पहली ही गेंद पर चौका लग गया और स्टेडियम का शोर सुनकर मन से आवाज उठी कि गलत जगह पहुंच गया। हिम्मत टूट रही थी कि दूसरे ही ओवर में एक विकेट मिल गया और मन की पूरी स्थिति बदल गई। बताया कि केवल 10 मिनट में मन:स्थिति बदल गई और लगा कि अब मैं खेल सकता हूं। अगले ही मैच में तीन विकेट लेकर मैन आफ द मैच बन गया और आत्मविश्वास बढ़ता ही गया।
क्रिकेटर नहीं बन पाता तो डाक्टर बनता

दबाव झेलने के सवाल पर राशिद खान ने बताया कि पहले मैच के दबाव से डर लगता था। अब दबाव आनंदित करता है। बताया कि अब अधिक तनाव व दबाव वाली स्थिति खुद खोजते हैं। विशेष तौर पर अंतिम ओवर में गेंद और रन की तुलनात्मक वाले मैचों में वह खुद गेंदबाजी मांगकर लेते हैं। राशिद ने बताया कि विराट कोहली ऐसे बल्लेबाज हैं जो हर तरह की गेंद खेल सकते हैं, इसलिए हर गेंदबाज की तरह उन्हें भी मन में डर रहता है। इसके अलावा उन्होंने हार्दिक पंड्या और अभिषेक शर्मा के हिटिंग की तारीफ की। कहा कि यदि वह क्रिकेटर नहीं बनते तो डाक्टर बनते और मरीजों का उपचार करते।
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