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Odisha News: जंगल किनारे पॉलिथीन की झोपड़ी में 10 साल से रह रही बुजुर्ग महिला, प्रशासन ने PM आवास का दिया भरोसा

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बुजुर्ग महिला। (फोटो- इंटरनेट)



जागरण संवाददाता, अनुगुल। मयूरभंज जिले के सिमिलिपाल वन परिक्षेत्र के समीप स्थित एक गांव में 70 वर्षीय राइबारी बिंधानी पिछले एक दशक से अधिक समय से पॉलिथीन शीट और टहनियों से बनी झोपड़ी में जीवन बिता रही हैं।

बारिश, सर्दी और गर्मी तीनों मौसमों में असुरक्षित हालात के बीच गुजर-बसर कर रही बुजुर्ग महिला का जीवन वन्यजीवों के साये में कट रहा है।

राइबारी ने बताया कि पहले उनका गांव की मुख्य सड़क के अंत में पक्का मकान था। माता-पिता के निधन के बाद वह मजदूरी के लिए बाहर चली गईं।

लौटने पर उन्हें पता चला कि मकान बिक चुका है और उनके नाम कोई जमीन शेष नहीं रही। इसके बाद से वह सड़क किनारे अस्थायी झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं।
पेंशन और राशन से चल रहा गुजारा

वर्तमान में उन्हें सरकार की ओर से प्रति माह 1000 रुपये की वृद्धावस्था पेंशन मिलती है। इसके साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 5 किलो चावल भी दिया जाता है। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों के कारण वह दिन में केवल तीन मुट्ठी पके चावल खाकर गुजारा करती हैं, ताकि राशन अधिक दिनों तक चल सके।

पहले वह जंगल से लकड़ी काटकर बेचती थीं, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण अब यह संभव नहीं है। ऐसे में पेंशन ही उनका एकमात्र सहारा है।
वन्यजीवों का खतरा

उनकी झोपड़ी सिमिलिपाल क्षेत्र के पास होने के कारण अक्सर सांप, जंगली भालू और हाथियों की आवाजाही रहती है। ग्रामीणों के अनुसार हाथी पास के खेतों में धान खाने आते हैं और उसी रास्ते से गुजरते हैं जहां राइबारी की झोपड़ी है। किसी भी समय हादसे की आशंका बनी रहती है।
पंचायत से नहीं मिली मदद

राइबारी का आरोप है कि उन्होंने कई बार पंचायत स्तर पर आवास के लिए गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस सहायता नहीं मिली। उनका नाम स्थायी आवास सूची में शामिल नहीं हो पाया।
हरकत में प्रशासन

मामला प्रकाश में आने के बाद अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट नेत्रानंद मलिक ने कहा कि अत्यंत दयनीय स्थिति में रह रहे लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

उन्होंने बताया कि संबंधित ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) को मौके पर जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए जाएंगे। यदि राइबारी पात्र पाई जाती हैं तो उन्हें चार डिसमिल जमीन आवंटित की जाएगी और उसी पर प्रधानमंत्री आवास योजना या राज्य सरकार की आवास योजना के तहत घर का निर्माण कराया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि ग्रामीण आवास निर्माण निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जाता है और लाभार्थी को निर्माण राशि किस्तों में सीधे खाते में दी जाती है।
सामाजिक संगठनों की मांग

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि बुजुर्ग महिला को तत्काल अस्थायी सुरक्षित आश्रय, अतिरिक्त राशन और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं, बल्कि शीघ्र कार्रवाई जरूरी है।

ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। लंबे इंतजार के बाद क्या राइबारी को पक्की छत मिल पाएगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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