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रूस बोला- भारत पर हमसे तेल नहीं खरीदने का दबाव:अमेरिका एनर्जी सप्लाई पर कंट्रोल चाहता है, ताकि दुनिया के देश उनसे महंगी गैस खरीदें

deltin55 Yesterday 21:50 views 2

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह भारत जैसे देशों पर दबाव बना रहा है ताकि वे रूस से सस्ता तेल न खरीदें। लावरोव ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई उसके कंट्रोल में रहे और देश मजबूर होकर महंगी अमेरिकी गैस खरीदें। उन्होंने यह बातें 9 फरवरी को डिप्लोमैटिक वर्कर्स डे के मौके पर कहीं।

लावरोव ने कहा कि अमेरिका ने डॉलर को हथियार की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। रूस की विदेश में रखी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है और रूस के खिलाफ लगातार पाबंदियां लगाई जा रही हैं।



उन्होंने कहा कि ट्रम्प सरकार यूक्रेन युद्ध खत्म करने की बात तो करती है, लेकिन जो प्रतिबंध पहले लगाए गए थे, वे अब भी जारी हैं। रूस के मुताबिक, यूक्रेन पर सहमति बनने के बाद भी अमेरिका नए प्रतिबंध लगाता रहा।

भारत समेत BRICS देशों पर रूस से दूरी बनाने का दबाव

रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका भारत और दूसरे BRICS देशों पर दबाव डाल रहा है कि वे रूस से दूरी बनाएं। रूस की तेल कंपनियों लुकोइल और रोसनेफ्ट पर रोक लगाई गई है और रूस के व्यापार और निवेश को सीमित करने की कोशिश हो रही है। ये सब गलत और अनुचित तरीके हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया अब तेजी से बदल रही है। पहले अमेरिका पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और पैसों के सिस्टम पर हावी था और डॉलर के जरिए अपनी ताकत दिखाता था, लेकिन अब उसकी पकड़ कमजोर हो रही है।

वहीं चीन, भारत और ब्राजील जैसे देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अफ्रीका के देश भी अब सिर्फ कच्चा माल बेचने के बजाय अपने यहां इंडस्ट्री लगाना चाहते हैं।

भारत जो मुद्दे उठाता है वे आज की जरूरतें

भारत की BRICS अध्यक्षता पर लावरोव ने कहा कि भारत जिन मुद्दों को आगे बढ़ा रहा है, वे आज की जरूरतों से जुड़े हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, खाने और ऊर्जा की सुरक्षा, तकनीक और AI जैसे विषय अहम हैं।

उन्होंने बताया कि भारत फरवरी में AI पर एक बड़ी बैठक करने वाला है, जिसमें रूस भी शामिल होगा। रूस का कहना है कि AI को लेकर नियम ऐसे होने चाहिए, जिनमें हर देश की आजादी बनी रहे और कोई एक देश बाकी देशों पर हुक्म न चलाए।

लावरोव बोले- पश्चिमी देश अपनी पकड़ नहीं छोड़ना चाहते

लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश अपनी पुरानी पकड़ छोड़ना नहीं चाहते। ट्रम्प सरकार के आने के बाद यह और साफ हो गया है कि अमेरिका ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी दुनिया पर कंट्रोल चाहता है और अपने मुकाबले वालों को रोकने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने बताया कि इन हालात का असर रूस के दूसरे देशों के साथ रिश्तों पर भी पड़ रहा है। रूस पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं। खुले समुद्र में रूसी जहाजों को रोका जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। कुछ देशों को रूसी तेल और गैस खरीदने पर टैरिफ भी देना पड़ रहा है।

लावरोव ने कहा कि रूस के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि देश सुरक्षित रहे और आगे बढ़ता रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप में कुछ नेता खुले तौर पर रूस के खिलाफ युद्ध की बात कर रहे हैं।

रूस का कहना है कि उसकी सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि यूक्रेन की जमीन से उसे कोई खतरा न हो और क्रीमिया, डोनबास और नोवोरोसिया में रहने वाले रूसी और रूसी भाषा बोलने वाले लोगों की सुरक्षा उसकी जिम्मेदारी है।

पश्चिमी देशों पर दूसरे देशों को उनका हक नहीं देने का आरोप

BRICS को लेकर लावरोव ने कहा कि इंडोनेशिया के जुड़ने से यह समूह और मजबूत हुआ है। रूस IMF, वर्ल्ड बैंक और WTO को खत्म नहीं करना चाहता, लेकिन चाहता है कि तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं को इन संस्थानों में उनका सही हक मिले। पश्चिमी देश इसका विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इसी वजह से रूस और BRICS देश मिलकर नए रास्ते तलाश रहे हैं। इसमें अपनी-अपनी करेंसी में व्यापार करना, नए पेमेंट सिस्टम बनाना, निवेश के नए तरीके और अनाज के लिए अलग बाजार तैयार करना शामिल है।

लावरोव ने साफ किया कि इसका मकसद किसी के खिलाफ जाना नहीं है, बल्कि खुद को एकतरफा दबाव से बचाना है।

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