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बिहार के गया में नकली दवा फैक्ट्री पर छापा, 5 करोड़ के ट्रामाडोल पाउडर से बनाते नकली गोलियां; मालिक समेत 9 गिरफ्तार

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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने अब बिहार के गया में नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री पर छापा मारकर बड़ी कार्रवाई की है। प्रतीकात्मक तस्वीर



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ड्रग्स तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दिल्ली क्राइम ब्रांच ने अब बिहार के गया में नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री पर छापा मार वहां से मालिक अरुण को गिरफ्तार कर लिया है।

इसके पास दवाइयां व वायल बनाने का लाइसेंस नहीं था। फैक्ट्री बिना लाइसेंस, ज़रूरी मैन्युफैक्चरिंग और एनालिटिकल केमिस्ट की गैर मौजूदगी में चल रही थी। वहां से भारी मात्रा में दवा बनाने के उपकरण, नकली टैबलेट, वायल, पैकिंग मटीरियल बरामद किया गया। वहां साइकोट्रापिक पदार्थ के जरिये ड्रग्स भी बनाई जाती थी।

इससे पहले क्राइम ब्रांच ने पटना के रामा कृष्णा नगर में एक फैक्ट्री पर छापा मारकर वहां से भारी मात्रा में नकली कफ सिरप व अन्य केमिकल बरामद किया था।पुलिस ने मालिक तनिष्क को गिरफ्तार कर लिया था। ड्रग्स के आदी लोग इसके कफ सिरफ का इस्तेमाल करते थे।

डीसीपी संजीव कुमार यादव के मुताबिक, अरुण मूलरूप से गया का ही रहने वाला है। फैक्ट्री से ज़िंक की 119800 नकली टैबलेट, एज़िथ्रोमाइसिन की 42,480 नकली टैबलेट, 27 किलो पैरासिटामोल, डिलोना एक्वा के 444 नकली एम्प्यूल व बड़े पैमाने पर दवाइयां बनाने वाली भारी मशीनें जब्त कर ली गई है। यह नेटवर्क अलग-अलग तरह की नकली दवाइयां, शीशियां, सिरप बनाने और इन प्रोडक्ट्स को दवा दुकानों और रीजनल सप्लायर के ज़रिए बेचकर मोटा पैसा कमाने में शामिल है।

कच्चा माल खरीदने, प्रोसेसिंग करने, बेचने का पूरा प्रोसेस गैर-कानूनी तरीके से किया जाता था, जिससे बड़े पैमाने पर आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ होता है। अरुण गैर-कानूनी तरीके से तस्करी किए गए ट्रामाडोल पाउडर (पांच किलो से ज़्यादा, कीमत पांच करोड़ से ज्यादा) को प्रोसेस करता था और अपनी फैक्ट्री में टैबलेट बनाता था। टैबलेट को फिर से दुकानों के ज़रिए बढ़ी हुई कीमतों पर बेचने के लिए भेज दिया जाता था। ऐसी टैबलेट का इस्तेमाल हेरोइन बनाने में किया जा रहा था।

यह ऑपरेशन भरोसेमंद इंटेलिजेंस, अलग-अलग राज्यों में लगातार और मिलकर की गई छापेमारी, टेक्निकल जांच और तेज़ पुलिस कार्रवाई पर आधारित था। इससे न सिर्फ दो नकली फैक्ट्रियां ध्वस्त की गई बल्कि जो लोग आम लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे, ऐसे नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।

इनके कब्जे से बड़े पैमाने पर कच्चा माल और साइकोट्रोपिक नेचर की प्रोसेस्ड नकली दवाएं, वायल जब्त किए गए। एसीपी सत्येंद्र मोहन व इंस्पेक्टर नितेश कुमार की टीम ने पहले पटना में इसी तरह की एक नकली दवा यूनिट का पर्दाफाश किया उसके बाद गया में चलने वाली अवैध फैक्ट्री को पकड़ लिया।

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