महाशिवरात्रि पर शिव-शक्ति पीठ देवघर में लाखों भक्तों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था।
डिजिटल डेस्क, रांची। कल 15 फरवरी (रविवार) को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में इस अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ेगा।
मंदिर के कपाट रातभर खुले रहेंगे, जहां चारों प्रहर विशेष पूजा-अर्चना होगी और भक्त जागरण करते हुए भोलेनाथ की आराधना करेंगे।
जागरण के संवाद सूत्र व मंदिर के पुजारी अजय परिहस्त बताते हैं, यहां महाशिवरात्रि इसलिए सबसे खास और अनोखी मानी जाती है, क्योंकि बाबा बैद्यनाथ धाम न केवल ज्योतिर्लिंग है, बल्कि एक शक्तिपीठ भी है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, दक्ष यज्ञ में माता सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव ने सती के शरीर को उठाकर तांडव किया था।
तब विष्णु जी के सुदर्शन चक्र से सती का हृदय यहां गिरा था। इसी कारण इसे \“हार्दपीठ\“ या हृदय पीठ कहा जाता है। यहां ज्योतिर्लिंग के ठीक ऊपर या साथ में माता सती का हृदय स्थापित माना जाता है, जिससे शिव और शक्ति का अद्भुत मिलन होता है।
शिवलिंग और शक्तिपीठ की एक साथ पूजा यहीं होती है, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग बनाती है। शिवरात्रि पर यह मिलन ऊर्जा चरम पर पहुंच जाता है, इसलिए लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।
बाबा का दरबार क्यों है बारात का केंद्र?
देवघर को बाबा का \“ससुराल\“ माना जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यहां शिवरात्रि को केवल पूजा नहीं, बल्कि एक भव्य पारिवारिक विवाह उत्सव की तरह मनाया जाता है।
मंदिर परिसर में शिव और पार्वती के मंदिरों के शिखरों को लाल रेशमी धागे से गठबंधन किया जाता है, जो अखंड वैवाहिक सुख का प्रतीक है।
रात में निकलने वाली बाबा की बारात मुख्य आकर्षण होती है, जिसमें देवी-देवता, भूत-पिशाच और साधु-संतों के वेश में हजारों भक्त शामिल होते हैं। इस बार बारात में पहली बार \“साइबर दैत्य\“ भी शामिल होगा, जो आधुनिक और पारंपरिक का अनोखा संगम होगा।
2026 में ऐसी है प्रशासन की तैयारियां
मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने लाखों भक्तों की भीड़ को देखते हुए कड़े इंतजाम किए हैं:
- वीआईपी पूजा पर पूर्ण प्रतिबंध: किसी भी वीआईपी या वीवीआईपी को विशेष पूजा या दर्शन की अनुमति नहीं। सभी भक्त सामान्य कतार में दर्शन करेंगे।
- शीघ्रदर्शनम सुविधा जारी: 600 रुपये के कूपन से शीघ्र दर्शन उपलब्ध रहेगा।
- पंचशूल स्थापना: मंदिर परिसर के सभी 22 मंदिरों से उतारे गए पंचशूल आज संबंधित शिखरों पर पुनः स्थापित किए जा रहे हैं। यह सुरक्षा और शक्ति का प्रतीक है।
- रातभर खुला दरबार: मंदिर रातभर खुला रहेगा, चार प्रहर की पूजा चलेगी। निशीथ काल पूजा सबसे महत्वपूर्ण है।
- सुरक्षा और सुविधाएं: सुल्तानगंज से देवघर मार्ग पर विशेष सुरक्षा बल, पेयजल, स्वास्थ्य शिविर और यातायात व्यवस्था।
पूजा मुहूर्त (देवघर के अनुसार)
महाशिवरात्रि तिथि: 15 फरवरी 2026 (रविवार)
- निशीथ काल पूजा: रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक (16 फरवरी की सुबह) – यह सबसे शुभ समय माना जाता है।
- चार प्रहर पूजा: रात भर जारी रहेगी, प्रदोष काल और ब्रह्म मुहूर्त विशेष फलदायी।
- पारण का समय: 16 फरवरी सुबह 7:00 बजे से।
झारखंड के अन्य बड़े मंदिर में भी धूम
राज्य के टॉप प्रमुख शिव मंदिरों में बैद्यनाथ धाम सबसे ऊपर है, लेकिन अन्य मंदिर भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यहां राज्य के प्रमुख शिव मंदिरों की सूची, उनकी विशेषताएं और इस बार की तैयारियां।
2. बासुकीनाथ मंदिर (दुमका)
देवघर से मात्र 43 किमी दूर स्थित, बैद्यनाथ धाम के साथ जुड़ा प्रमुख शिवालय। भगवान शिव यहां “बासुकीनाथ“ रूप में विराजमान हैं। कांवर यात्रा में दोनों मंदिरों को एक साथ दर्शन करने की परंपरा है।
जागरण के संवाद सूत्र व मंदिर के पुजारी रूपेश झा वाली बताते हैं कि इस बार मेले का आयोजन, स्थानीय भजन-कीर्तन और रोशनी की विशेष सजावट की गई है।
अभिषेक के लिए दूध, फल, बेलपत्र तैयार। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात, भीड़ नियंत्रण और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की गई है।
3. हरिहर धाम (गिरिडीह)
दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग (65 फीट ऊंचा) यहां स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह मंदिर शिवरात्रि पर मेले और जागरण का केंद्र बनता है।
शिवरात्रि की तैयारियां: विशाल शिवलिंग की विशेष रोशनी और सजावट। रात भर भजन-कीर्तन, मेले में स्टॉल, स्वास्थ्य कैंप और यातायात प्रबंधन। श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित दर्शन की व्यवस्था।
4. पहाड़ी मंदिर (रांची)
राजधानी रांची के बीचों-बीच पहाड़ी पर स्थित प्रमुख शिव मंदिर। यहां से पूरे शहर का नजारा दिखता है। शिवरात्रि पर रात भर जागरण और पूजा होती है।
शिवरात्रि की तैयारियां: विशेष मंडप, लाइटिंग और अभिषेक सामग्री (दूध, गंगा जल, फूल) तैयार। पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग, सीसीटीवी और भीड़ नियंत्रण। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विशेष आमंत्रण दिया गया है। शहरवासी बड़ी संख्या में जुटेंगे।
5. देवड़ी मंदिर (रांची)
तमाड़ क्षेत्र में प्राचीन शिव मंदिर, आदिवासी संस्कृति से गहराई से जुड़ा। यहां स्थानीय रीति-रिवाजों से पूजा होती है, जो झारखंड की ग्रामीण शिव भक्ति का प्रतीक है।
शिवरात्रि की तैयारियां: आदिवासी लोक नृत्य, भजन और पारंपरिक पूजा। मंदिर समिति द्वारा सजावट, प्रसाद वितरण और स्वास्थ्य जांच। ग्रामीण सड़कों और परिवहन पर फोकस।
6. कर्णेश्वर धाम (साहिबगंज)
प्राचीन और शक्तिशाली शिव मंदिर, जहां शिवरात्रि पर अभिषेक और जागरण प्रमुख।
तैयारियां: सजावट, भजन और सुरक्षा व्यवस्था।
7. झारखंड महादेव मंदिर
पश्चिमी सिंहभूम में आस्था का बड़ा केंद्र। स्वयंभू शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है, लाखों भक्त आते हैं। इस बार भव्य सजावट और पूजा आयोजन।
8. अंगराबाड़ी शिव मंदिर (खूंटी)
रांची से करीब 30 किमी, प्राकृतिक सुंदरता वाला मंदिर। शिवरात्रि पर जागरण और मेले की तैयारी। उत्साह का माहौल।
9. बुद्धा बाबा शिव मंदिर (झींझी पहाड़ी)
वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सिन्हा ने बताते हैं कि कोयलांचल धनबाद के झींझी पहाड़ी में 900-1000 साल पुराना, कालिंगा शैली का अद्भुत स्थापत्य मंदिर है। आस्था का बड़ा केंद्र है। सरकार अगर ध्यान दें तो पर्यटन का बड़ा केंद्र हो सकता है।
तैयारियां: विशेष पूजा और सजावट।
10. टूटी झरना शिव मंदिर (रामगढ़)
जहां गंगा जी स्वयं जलाभिषेक करती हैं (प्राकृतिक झरना)। शिवरात्रि पर चमत्कारी दृश्य, तैयारियां: श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं। |