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₹100 करोड़ के रजिस्ट्री फर्जीवाड़े के मामले में ED की कार्रवाई, 3 आरोपियों के विरुद्ध कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट

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जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रजिस्ट्री फर्जीवाड़े से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विशेष पीएमएलए अदालत में तीन आरोपितों के विरुद्ध अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है।

ईडी की ओर से दायर चार्जशीट में हुमायूं परवेज, मो. वकील और मुकेश कुमार गुप्ता को आरोपित बनाया गया है। इन पर मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इससे पहले ईडी ने अगस्त 2024 में रजिस्ट्री फर्जीवाड़े/अवैध भूमि खरीद के मामले में कई आरोपितों के ठिकानों पर छापेमारी की थी।

ईडी के अनुसार यह एक संगठित और सुनियोजित गिरोह था, जिसने राज्य के रजिस्ट्री और राजस्व अभिलेखागार में भूमि अभिलेखों से छेड़छाड़ कर स्वामित्व बदले, उन्हें अवैध रूप से बेचा और करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की। ईडी की जांच में सामने आया कि आरोपितों ने देहरादून के मौजा मजरा, परगना केंद्रीय दून क्षेत्र में स्थित 2,550 वर्ग गज की कीमती जमीन से संबंधित 1958 के मूल रिकॉर्ड में हेरफेर किया।

आधिकारिक रजिस्टरों में पुराने अभिलेखों को बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। इसके बाद वर्ष 2019 से 2020 के बीच इन जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री कर उन्हें बेच दिया गया।

मृत रिश्तेदारों के नाम पर खेल

ईडी ने पर्दाफाश किया कि जमीन पहले आरोपितों के दिवंगत रिश्तेदारों के नाम ट्रांसफर दिखाई गई। उदाहरण के तौर पर, हुमायूं परवेज के दिवंगत पिता जलीलुर रहमान के नाम पर संपत्ति दर्ज कराई गई। इसके बाद आरोपित खुद को इन मृत व्यक्तियों का वैध वारिस बताकर संपत्ति पर कानूनी अधिकार जताते थे। फर्जी वसीयत और दस्तावेजों के आधार पर जमीन को भोले-भाले खरीदारों को बेच दिया जाता था।

करोड़ों की अवैध कमाई

ईडी के अनुसार हुमायूं परवेज ने 11 फर्जी रजिस्ट्रियों के जरिये लगभग 3.66 करोड़ रुपये अर्जित किए। इसी तरह मो. वकील ने अवैध जमीन बिक्री से करीब 40 लाख रुपये कमाए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी रजिस्ट्रार कार्यालयों के कुछ कर्मचारियों से मिलीभगत कर मूल अभिलेखों तक पहुंच बनाते थे। देहरादून और सहारनपुर के रजिस्ट्रार कार्यालयों में रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की गई।

छापों में नकदी और जेवरात बरामद

मामले की जांच के दौरान ईडी ने अगस्त 2024 में तलाशी अभियान चलाया। जिसमें आरोपितों के ठिकानों से 24.50 लाख रुपये नकद जब्त किए और 11.50 लाख रुपये बैंक खातों में फ्रीज किए गए। साथ ही 58.80 लाख रुपये मूल्य के हीरे, सोना और चांदी के आभूषण बरामद किए गए। ईडी का कहना है कि आरोपियों ने अवैध कमाई को वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की कोशिश की, जो मनी लांड्रिंग का स्पष्ट मामला है।

सुनियोजित आपराधिक साजिश

जांच एजेंसी के मुताबिक यह पूरा मामला एक सुव्यवस्थित आपराधिक साजिश का हिस्सा था, जिसमें सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर प्रोसीड्स क्राइम (पीओसी) तैयार किए गए।

ईडी ने विशेष पीएमएलए अदालत में दाखिल चार्जशीट में आरोपितों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। मामले में आगे भी जांच जारी है और अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस ने किए थे 13 मुकदमे दर्ज, 20 आरोपितों को किया गिरफ्तार

रजिस्ट्री फर्जीवाड़े का मामला जुलाई 2023 में प्रकाश में आया था। जिसमें पता चला कि कुछ नामी अधिवक्ताओं ने प्रॉपर्टी डीलरों और भूमाफिया से मिलकर देहरादून के सब रजिस्ट्रार कार्यालय के रिकॉर्ड रूम में घुसपैठ कर रजिस्ट्रियों के रिकॉर्ड बदल दिए हैं। साथ ही कलेक्ट्रेट के राजस्व अभिलेखागार से रिकार्ड भी गायब किए गए हैं।

इस काम में सब रजिस्ट्रार कार्यालय के कुछ कार्मिकों ने भी फर्जीवाड़े में मदद की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त रुख के बाद प्रकरण में 02 एसआईटी (पुलिस व स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग) का गठन किया गया। पुलिस ने रजिस्ट्री फर्जीवाड़े में 13 मुकदमे दर्ज कर 20 आरोपितों को जेल भेजा।

इनमें से एक आरोपी केपी सिंह की सहारनपुर जेल में मौत हो चुकी है। वहीं, स्टांप विभाग की एसआईटी की संस्तुति पर 100 के करीब एफआईआर की गई। यह अब तक का सबसे बड़ा रजिस्ट्री और जमीन फर्जीवाड़ा माना गया। पुलिस मामले में 13 आरोपितों के विरुद्ध कुल 21 चार्जशीट पहले ही दाखिल कर चुकी है।

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