जागरण संवाददाता, लखनऊ। राजधानी में मांझे से लोगों के घायल होने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बीते बुधवार को धारदार मांझे की चपेट में आने से दुबग्गा निवासी 30 वर्षीय मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव मो.शोएब की मौत हो गई। एक सप्ताह में लगभग आधा दर्जन लोग मांझे से घायल हो गए। शुक्रवार दोपहर भी मांझे के चलते बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। राहगीरों की मदद से उन्हें सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने गर्दन पर छह टांके लगाए हैं।
इंदिरानगर निवासी ध्रुव नारायण पांडेय शुक्रवार को दोस्त के साथ बाइक से बंगला बाजार गए थे। वापसी के दौरान कैंट इलाके में अचानक से उनके गले में धारदार मांझा आकर फंस गया। वह कुछ समझ पाते इसके पहले ही मांझे से गर्दन में गहरा घाव हो गया। किसी तरह उन्होंने बाइक रोकी। इसके बाद उन्हें सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। इलाज के दौरान उनके गले में छह टांके लगाए गए। उनकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। ध्रुव ने पुलिस से मांझे के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। कैंट थाना प्रभारी गुरप्रीत कौर ने बताया कि थाने पर घटना को लेकर कोई तहरीर नहीं दी गई है। अगर तहरीर मिलती है तो उसके आधार पर कार्रवाई होगी।
छापेमारी का भी नहीं दिख रहा असर
शोएब की मौत के बाद पुलिस ने वृहद स्तर पर अभियान चलाकर जानलेवा मांझे की बिक्री, इस्तेमाल और परिवहन पर नकेल कसने के लिए कई इलाकों में छापेमारी की थी। मांझा लेकर जा रहे गोमती नगर विस्तार निवासी दो युवकों को जेल भी भेजा जा चुका है। इसके बावजूद मांझे पर लगाम नहीं लग पा रही है। यह घटनाएं पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा कर रही हैं। |