प्रयागराज के रेलवे अस्पताल में डॉक्टर ने मशीन में कुचली हाथ की उंगलियों को जोड़ दिया।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। कहते हैं डाॅक्टर धरती पर भगवान का रूप होते हैं। उत्तर मध्य रेलवे के केंद्रीय चिकित्सालय (प्रयागराज) में जो हुआ, उसने इस कहावत पर एक बार फिर चरितार्थ कर दिया। यह घटना करछना के विकास कुमार के साथ घटी, जिनके लिए उनका दाहिना हाथ सिर्फ मांस और हड्डी का एक बेजान टुकड़ा बनकर रह गया था। डाॅ. संजय कुमार ने उसे फिर से सक्रिय कर दिया।
मशीन ने छीनी मुस्कान, अस्पतालों ने खड़े किए थे हाथ
एक औद्योगिक दुर्घटना ने विकास कुमार की जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया था। काम के दौरान मशीन की चपेट में आने से उनका दाहिना हाथ बुरी तरह कुचल गया। उंगलियां अपना आकार खो चुकी थीं और हाथ पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गया था। विकास कई नामी अस्पतालों के चक्कर लगा चुके थे, लेकिन हर जगह से एक ही जवाब मिला- \“अब कुछ नहीं हो सकता।\“। हार चुके विकास जब डाॅ. संजय कुमार के पास पहुंचे, तो उनके पास खोने को कुछ नहीं था, बस एक आखिरी उम्मीद बची थी।
120 मिनट का वो \“सर्जिकल करिश्मा\“
11 फरवरी, 2026 की वह तारीख विकास के जीवन में नया सवेरा लेकर आई। डाॅ. संजय कुमार ने इस चुनौती को स्वीकार किया। आपरेशन थिएटर के भीतर दो घंटे तक एक जटिल \“रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी\“ की।डाॅक्टर की कुशलता और टीम (सिस्टर मंजू सोनकर, नर्स अंकिता और सहायक मूलचंद, आरती व रोमेश) की मेहनत रंग लाई। आपरेशन के बाद जब विकास की उंगलियों ने हरकत की, तो वह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था।
डाक्टर साहब, आपने मुझे फिर से जीना सिखा दिया...
आज विकास न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी लौट आया है। भावुक होते हुए विकास कहते हैं, \“मैं उम्मीद हार चुका था, लेकिन डा. संजय ने मुझे एक नया हाथ और एक नई जिंदगी दी है।\“ रेलवे अस्पताल की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि जहां आधुनिक तकनीक और अटूट संकल्प से नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है। |