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सिवान में नीतीश सरकार की इस योजना पर 10 पंचायतों में विवाद, लोगों की जेब से नहीं निकल रहे 30 रुपये

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धरातल पर नहीं उतर रही सरकार की योजना। (जागरण)



जागरण संवाददाता, सिवान। साफ-सुथरा वातावरण न सिर्फ गांव को आकर्षक बनाता है, बल्कि गांव की पहचान भी बढ़ाता है।

इसी परिकल्पना को साकार करने व कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण व इसका पुर्नचक्रण करते हुए इसे मूल्यवान संसाधनों यथा खाद, ईंधन, उर्जा में परिवर्तित कर पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से जिले के सभी 19 प्रखंडों के 283 पंचायतों में वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना संचालित की जा रही है।

लेकिन विभिन्न कारणों से अबतक 19 पंचातयों में सरकार की योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। वहीं 264 पंचायतों में डब्लूपीयू का निर्माण कर दिया गया है।

स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक विनोद कुमार ने बताया कि दो पंचायतों यथा गुठनी प्रखंड के बलुआ व गोरेयाकोठी प्रखंड के सादीपुर पंचायत में वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट के निर्माण को लेकर जमीन नहीं मिलने के कारण योजना को प्रगति नहीं मिल पा रही है।

वहीं, गोरेयाकोठी प्रखंड के हरिहरपुर कला व लीलारू औरंगाबाद पंचायत में डब्लूपीयू निर्माण को लेकर खाका तैयार कर लिया गया है। जबकि एक पंचायत में नींव डालने का कार्य पूर्ण हो गया है। जबकि महाराजगंज प्रखंड के सारंगपुर पंचायत में नींव डालने के साथ ही भूमि को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है, जो न्यायालय में लंबित है।

इसके अलावा मैरवा प्रखंड के बभनौली पंचायत में डब्लूपीयू का छत तक व दरौली प्रखंड के कृष्णापाली पंचायत में चबूतरा तक निर्माण कार्य पूर्ण करा लिया गया है।

वहीं, पचरूखी प्रखंड के हरदिया पंचायत व गुठनी प्रखंड के बरपलिया पंचायत में डब्लूपीयू के निर्माण को लेकर जमीन को चिह्नित करते हुए एनओसी प्राप्त कर लिया गया है, लेकिन अबतक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

जबकि दारौंदा प्रखंड के करसौत, हसनपुरा के सहुली, हुसैनगंज के मड़कन, भगवानवुर हाट के खेढ़वा, दरौली प्रखंड के सरहरवा, बड़हरिया प्रखंड के लकड़ी व सदरपुर पंचायत तथा रघुनाथपुर प्रखंड के रघुनाथपुर, निखती कला व बड़ुआ पंचायत में किसी ना किसी विवाद को लेकर निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है, हालांकि जिला प्रशासन से लेकर प्रखंड प्रशासन के स्तर से विवादों को सुलझाकर निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास जारी है।
स्वच्छता को लेकर ग्रामीण नहीं दे रहे 30 रुपये मासिक शुल्क

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत गांव को साफ-सुथरा (ओडीएफ प्लस) बनाने हेतु ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए घर-घर से 30 रुपये मासिक उपयोगकर्ता शुल्क लेने का निर्देश है, हालांकि, कई ग्रामीण इस शुल्क को देने में कतरा रहे हैं, जिसके कारण कचरा उठाव और स्वच्छता कर्मियों के मानदेय में भी बाधा आ रही है।

इसका मुख्य कारण विभाग द्वारा आम लोगों में जागरूकता की कमी माना जा रहा है। हालांकि आम ग्रामीण लोगों का कहना है कि जब उन्हें किसी प्रकार की सुविधा का लाभ हीं नहीं मिल रहा है तो वे मासिक शुल्क का भुगतान हीं क्यों करें।
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