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महाशिवरात्रि रविवार को: जानें कब, कहां और कैसे करें पूजा ताकि मिले भोलेनाथ का विशेष फल

deltin33 2026-2-13 12:56:51 views 1275
  

रात्रि के चारों प्रहर में शिव पूजा का विशेष महत्व



संवाद सूत्र,गोह (औरंगाबाद)। रविवार को महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। गोह (औरंगाबाद) के आचार्य पंडित लालमोहन शास्त्री ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि सनातन परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। मान्यता है कि इसी दिन ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य हुआ था। रात्रि के चारों प्रहर में भगवान शिव की विशेष पूजा का विधान है। इस दिन उपवास, जप और अभिषेक से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
कब करें पूजा, क्या है शुभ मुहूर्त

आचार्य के अनुसार संध्या 5:35 बजे से प्रातः 6:24 बजे तक शिवलिंग की अर्चना श्रेष्ठ मानी गई है। पूरी रात चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। हर प्रहर में जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक किया जाता है।

रात्रि में शिव–पार्वती विवाह महोत्सव भी मनाया जाता है। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाकर भक्ति गीतों का आयोजन होता है। भक्त “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए जागरण करते हैं।
कहां विशेष आयोजन होगा

भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों और उप-ज्योतिर्लिंगों में विशेष आयोजन होते हैं। गोह स्थित च्यवनाश्रम देवकुंड मगध क्षेत्र के प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है। यहां महाशिवरात्रि पर शिव–पार्वती विवाह की भव्य परंपरा निभाई जाती है।

सन्यासी मठ देवकुंड (करपी, अरवल) से बारात निकलती है। यह नौरंगा, बान्धवां, हसपुरा होते हुए पार्वती मंदिर तक पहुंचती है। अंत में दुग्धेश्वर महादेव मंदिर, देवकुंड गोह में विवाह संस्कार संपन्न होता है।
परंपरा और ऐतिहासिक महत्व

इस परंपरा की शुरुआत सन्यासी मठ के संस्थापक स्वामी बाल पुरी जी महाराज ने की थी। तब से यह विवाह महोत्सव निर्विघ्न रूप से आयोजित होता आ रहा है। प्राचीन शिव गर्भ मंदिरों में शिव परिवार की प्रतिमाएं एक साथ नहीं मिलती थीं।


अलग-अलग मंदिरों में नंदी, गणेश, गौरी और कार्तिकेय की स्थापना होती थी। पहले लोग ‘शिव स्थान’ कहकर पूजा करते थे। बाद में शिव परिवार की संयुक्त स्थापना की परंपरा बढ़ी।
कैसे करें पूजा, क्या चढ़ाएं जिससे मिलेगा फल

  • महाशिवरात्रि पर प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  • शिवलिंग पर जल, गंगाजल और दूध से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित करें।
  • धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
  • सच्चे मन से की गई पूजा और संयमित व्रत से मनोकामना पूर्ण होती है।
  • श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक की गई आराधना से भोलेनाथ का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।


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