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डिबार के बाद एजेंसी को अब देना 1.36 करोड़
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। पहले काम से अधिक राशि का भुगतान कर दिया गया। एजेंसी के काम नहीं करने पर उसे डिबार कर दिया गया। अब एजेंसी को काम से अधिक भुगतान की गई राशि वापस करने को नोटिस भेजा जा रहा है।
मामला स्मार्ट सिटी योजना के तहत सिकंदरपुर स्टेडियम के विकास का काम का है। समय से नहीं करने के कारण डिबार की गई एजेंसी साई इंजिकान एंड कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. से 1.36 करोड़ रुपये की वसूली की कवायद शुरू कर दी गई है।
डिबार किए जाने से पहले एजेंसी द्वारा किए गए कार्यों के आकलन में यह पाया गया कि एजेंसी को एक करोड़ 36 लाख 44 हजार 325 रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। इसे वापस करने के लिए कई बार एजेंसी के प्रोपराइटर रितेश रंजन सिंह को नोटिस भेजा गया।
एजेंसी ने पैसा वापस नहीं किया। इसके बाद मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने बकाया सरकारी राशि की वसूली को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए नीलाम पत्र वाद में ठेकेदार के खिलाफ रिकवरी आदेश जारी कराया है।
नीलाम पत्र पदाधिकारी डीडीसी ने सुनवाई के बाद एजेंसी के प्रोपराइटर को एक करोड़ 36 लाख 44 हजार 325 रुपये ब्याज समेत एक माह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया है। अभिलेख की जांच के बाद नीलामी पत्र पदाधिकारी ने ठेकेदार की आपत्तियों को खारिज करते हुए वसूली कार्रवाई को सही ठहराया।
आदेश में कहा गया है कि निर्धारित अवधि (एक महीना) में राशि जमा नहीं करने पर बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 के तहत कुर्की-जब्ती सहित जबरन वसूली की कार्रवाई की जाएगी। मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ऋतुराज प्रताप सिंह ने कहा अनुबंध का उल्लंघन या बकाया भुगतान से बचने की कोशिश किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
एक बीच यह भी सवाल उठ रहा है कि एजेंसी को बिना काम किए अधिक भुगतान कैसे कर दिया गया। स्मार्ट सिटी कंपनी सूत्रों के अनुसार एजेंसी द्वारा जमा किया गया सुरक्षा राशि अधिकारियों की लापरवाही से लैप्स कर गया जिससे एजेंसी को किया गया अधिक भुगतान फंस गया। मामला सामने आने के बाद स्मार्ट सिटी कंपनी के चीफ फाइनेंस अधिकारी मो. नौशाद को कार्य से मुक्त कर दिया गया था।
बताते चलें कि पहली फरवरी 2021 में निविदा के माध्यम से एजेंसी को 19.8 करोड़ में सिकंदरपुर स्टेडियम को मल्टी परपज स्पोर्ट्स स्टेडियम के रूप में विकसित करने का कार्यादेश दिया गया था। एजेंसी को 15 माह में काम पूरा करना था।
बार-बार समय विस्तार देने के बाद भी जब काम पूरा नहीं किया गया तो वर्ष 2024 में एजेंसी को डिबार कर दिया गया और टेंडर निकाल नई एजेंसी बहाल कर बचे कार्य को पूरा किया जा रहा है। डिबार किए जाने के बाद एजेंसी द्वारा किए गए कार्य का आकलन किया गया और शेष राशि को वापस करने का निर्देश दिया गया था। |
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