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चीन से बैठकर उत्तराखंड में जालसाजी का नेटवर्क चला रहा किंग-पिन, पुलिस ने दो बड़े एजेंट किए गिरफ्तार

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चीन में बैठकर उत्तराखंड में ठगी का नेटवर्क चला रहा किंग-पिन। वहीं, उत्तराखंड के एएसपी (साइबर) कुश मिश्रा। फोटो- जागरण



अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। आनलाइन फ्राड करने वाले ठगों की तलाश में पहली बार उत्तराखंड साइबर पुलिस चीन में बैठे गैंग के सरगना किंग-पिन की जड़ तक पहुंच गई है। किंग-पिन चीन से भारत में साइबर फ्राड का गिरोह चला रहा है।

हांगकांग का इंटरनेट प्रोटोकाल प्रयोग करने के कारण अब तक पुलिस चीन में बैठे सरगना को चिह्नित नहीं कर सकी, लेकिन उत्तराखंड पुलिस निवेशक बनकर आनलाइन ठगी के लिए संचालित व्हाट्स एप ग्रुप में शामिल हुई तो परतें खुलती चली गईं।

पुलिस ने ठगी का पूरा नेटवर्क खंगालते हुए उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों के लिए सिरदर्द बने किंग-पिन के दो बड़े एजेंट गिरफ्तार कर लिए हैं।
निवेशक बनी पुलिस और खोला राज

वाट्सएप ग्रुप में चीन में बैठा मास्टमाइंड, इंडिया में उसके गुर्गों के अलावा शिकार बनाने के लिए जोड़े गए स्थानीय लोग होते हैं।

इसके अलावा बड़ी संख्या में उत्प्रेरक भी ग्रुप में जोड़े जाते हैं, जो निवेशकों को रकम निवेश करने के लिए प्रेरित करते हैं।

पुलिस ने नेटवर्क तक पहुंचने के लिए खुद निवेशक बनकर ग्रुप में एंट्री ली। टीम ने चैट, काल रिकार्ड, ट्रांजेक्शन पैटर्न और डिजिटल आइपी लाग्स की बारीकी से निगरानी की।

कई दिनों की पड़ताल के बाद भारत में सक्रिय दो अहम एजेंटों की पहचान हुई। इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। यह नेटवर्क केवल एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश में फैला हुआ है। इसमें उत्तराखंड से भी एजेंट शामिल हैं।
भरोसे का जाल और लालच की स्क्रिप्ट

साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता है। ग्रुप में कुछ दिन तक नए सदस्य को छोटे फायदे दिखाए जाते हैं, फिर असली खेल शुरू होता है।

लिमिटेड आफर, सिर्फ आज का मौका, वीआईपी इन्वेस्टमेंट स्लाट जैसे मैसेज भेजकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जाता है।

स्थानीय एजेंट आसपास के शहरों और कस्बों में बैठकर खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताते हैं और बड़ी रकम निवेश कराने के लिए प्रेरित करते हैं।
कई खातों में घुमाते रकम

आपरेशन के दौरान पुलिस को पता चला कि निवेश के नाम पर ली गई रकम सीधे किसी एक खाते में नहीं जाती है।

पहले उसे म्यूल अकाउंट्स यानी फर्जी या किराए पर लिए गए बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है।

फिर कई चक्र में घुमाकर रकम को अलग-अलग खातों और डिजिटल वालेट में भेजा जाता है, ताकि जांच एजेंसियों के लिए ट्रांजेक्शन की कड़ी को जोड़ना मुश्किल हो।


किंग-पिन के दो गुर्गे देहरादून में आनलाइन ठगी गैंग के विस्तार के लिए पहुंचे थे, इन्हें पकड़ने में सफलता मिली है। इसी तरह ब्रो-पे, एचएनएनपे, एचवाइवाइपे जैसे कई बड़े कंपनी पैनल हैं, जो साइबर अपराध से अर्जित रकम खपाने और घुमाने का काम कर रहे हैं। इन पर भी जल्द बड़ी कार्रवाई की जाएगी।
--कुश मिश्रा, एएसपी साइबर, उत्तराखंड


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