राजेश कश्यप-
अभी-अभी सोकर उठा और जैसे फेसबुक खोला तो सबसे पहला फोटो अखिलेश सिंह दादा का दिखाई दिया, मैंने सोचा शायद आज दादा का जन्मदिन होगा लेकिन मैंने जब पोस्ट को पढ़ा तो सन्न रह गया क्योंकि वह खबर उनके आकस्मिक निधन की थी, पोस्ट के माध्यम से जैसे ही यह पता चला कि Akhilesh Singh दादा अब हमारे बीच नहीं रहे तो इस खबर पर विश्वास नहीं हुआ और फिर कई पत्रकार साथियों की आईडी पर जाकर देखा तो पता चला कि वाकई में अखिलेश दादा का निधन हो गया है, उनके निधन की खबर से मन बहुत दुखी और द्रवित है क्योंकि अखिलेश दादा सदैव बुरे वक्त में मेरे साथ खड़े रहे।
अभी हाल ही में जब मेरा एक्सीडेंट हुआ तो दादा न सिर्फ मुझे देखने आए बल्कि जबरदस्ती मुझे कुछ रुपए यह कहकर दे गए कि राजेश रख लो काम आयेंगे, और यह भी कहा कि और जरूरत हो तो बता देना, आज मैंने अपना बड़ा भाई खो दिया, अखिलेश दादा ने सदैव हम जैसे युवा पत्रकारों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, अखिलेश दादा बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति की शख्सियत थे और हमेशा यह कहते थे कि हम रामजी के और रामजी हमारे,
अखिलेश दादा ने सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया, मैंने जब भी किसी की मदद करने की अपील सोशल मीडिया पर की तो दादा का फोन आता था कि राजेश कहां हो, फलां जगह आ जाओ और उसके बाद वह अपनी सहयोग राशि देकर गरीबों की मदद करते थे, मदद करने के बाद दादा कहते थे कि राजेश मेरा नाम कहीं मत लिखना क्योंकि मदद और दान गुप्त रखा जाता है, आज ऐसे शख्स को मैंने खो दिया है, दादा आपका यूं असमय संसार से चले जाना मेरी व्यक्तिगत क्षति तो है ही लेकिन आपके देहत्याग से सामाजिक और पत्रकारिता क्षेत्र में भी एक शून्य सा शेष रह गया है…
अलविदा अखिलेश दादा, ईश्वर आपकी पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें… ॐ शांति विनम्र श्रद्धांजलि
भरत पांडेय-
क्या कोई ऐसे भी चला जाता है? सदैव मस्त और व्यस्त नजर रहने वाले “हम रामजी के रामजी हमारे हैँ” गीत को गुनगुनाने और भक्ति संगीत के कार्यक्रमों में गा कर सुनाने वाले हमारे परम प्रिय भाई Akhilesh Singh जी, प्रबंधक डाल सिंह मेमो0 विद्यालय का एक झटके में गोलोकधाम गमन झकझोर गया। उनके पैतृक गाँव आशा में आज समाज के हर वर्ग का व्यक्ति व्यथित मन से अंतिम दर्शन को पहुंचा।


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