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सोना-चांदी में पैसा लगाएं या रुकें? गोल्ड-सिल्वर ETF से SIP तक, LIC MF के एमडी ने 7 सवालों में सब समझा दिया

Chikheang 3 hour(s) ago views 276
नई दिल्ली| क्या आप सोने-चांदी में निवेश (gold silver investment) करके मोटा पैसा कमाना चाहते हैं? लेकिन धातुओं में लगातार उतार-चढ़ाव के चलते कंफ्यूज हैं? तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल, निवेशकों के मन में अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोना-चांदी में निवेश करें या पिर नहीं। खासकर गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ (gold silver etf) में तेज उतार-चढ़ाव के बीच। बाजार में अनिश्चितता है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि घबराहट में फैसला नहीं, रणनीति से निवेश करना बेहतर है।

इसे लेकर जागरण बिजनेस के एडिटर स्कंध विवेक धर ने एलआईसी म्यूचुअल फंड के एमडी और सीईओ आरके झा से बातचीत की, जिसमें उन्होंने निवेशकों सोना-चांदी में निवेश न करने की सलाह दी और उन्होंने निवेश के सुरक्षित ऑप्शन भी गिनाए। पढ़िए बातचीत के मुख्य अंशः
सवालः क्या अभी सोना-चांदी खरीदने का सही समय है?

जवाब: कीमतों में हालिया तेजी के बाद हल्का करेक्शन आ सकता है, इसलिए एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचें। अगर पोर्टफोलियो में गोल्ड-सिल्वर कम है, तो थोड़ा-थोड़ा SIP या चरणबद्ध तरीके से निवेश करें। लंबी अवधि में सोना अनिश्चितता और महंगाई के खिलाफ ढाल माना जाता है।
सवालः फिजिकल गोल्ड खरीदें या गोल्ड ईटीएफ में निवेश करें?

जवाब: फिजिकल गोल्ड में मेकिंग चार्ज, स्टोरेज और शुद्धता की चिंता रहती है। गोल्ड ETF या गोल्ड फंड ऑफ फंड में वही एक्सपोजर कम झंझट में मिलता है, पारदर्शी कीमत, आसान खरीद-फरोख्त और डीमैट में होल्डिंग। इसलिए वित्तीय एसेट के तौर पर ETF ज्यादा सुविधाजनक हैं।
सवालः क्या सिल्वर ईटीएफ में निवेश करना सही है?

जवाब: सिल्वर का औद्योगिक इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर, इलेक्ट्रिक व्हीकल में तेजी से बढ़ रहा है। मांग बढ़ने पर कीमतों को सहारा मिल सकता है। लेकिन सिल्वर ज्यादा वोलैटाइल है, इसलिए पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा (जैसे 5-10%) ही रखें।
सवालः अगर गोल्ड-सिल्वर गिर जाए तो?

जवाब: कमोडिटी में उतार-चढ़ाव सामान्य है। टाइमिंग की गारंटी नहीं होती। इसलिए एसेट एलोकेशन रखें, गोल्ड-सिल्वर 10-15% तक, बाकी इक्विटी-डेट में बैलेंस। गिरावट में चरणबद्ध खरीद औसत लागत कम करती है।

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सवालः गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ के अलावा क्या ऑप्शन हैं?

जवाब:

  • इक्विटी म्यूचुअल फंड (लार्ज/मिड/स्मॉल कैप): लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए। SIP से वोलैटिलिटी मैनेज होती है।
  • डेट फंड/बॉन्ड: स्थिरता और नियमित आय के लिए।
  • हाइब्रिड फंड: इक्विटी+डेट का संतुलन, मध्यम जोखिम वालों के लिए।
  • इंटरनेशनल फंड: भौगोलिक विविधता, डॉलर एसेट एक्सपोजर।
  • REITs/InvITs: रियल एस्टेट/इन्फ्रा से नियमित आय का विकल्प।

सवालः बाजार में सकारात्मक संकेत हैं?

जवाब: वैश्विक ट्रेड समझौते, टैरिफ में नरमी और बजट घोषणाओं से माहौल बेहतर हुआ है। FPI फ्लो धीरे-धीरे लौट सकते हैं। ऐसे माहौल में गोल्ड-सिल्वर पूरी तरह छोड़ना भी ठीक नहीं, लेकिन ओवरवेट करना भी जोखिम भरा है।
सवालः तो निवेशकों को क्या करना चाहिए?

जवाब: सोना-चांदी पोर्टफोलियो का बीमा हैं, पूरी रणनीति नहीं। ETF के जरिए सीमित, चरणबद्ध निवेश रखें और बाकी रकम इक्विटी-डेट में लक्ष्य के हिसाब से लगाएं। धैर्य, विविधता और अनुशासन, यही असली फॉर्मूला है।
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