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संसद में बोलते हुए सांसद पद्मश्री हेमंत गुप्ता।
जागरण संवाददाता, बठिंडा। राज्यसभा में यूनियन बजट पर चर्चा के दौरान सांसद पद्मश्री राजिंदर गुप्ता ने सरकार की आर्थिक नीतियों की सराहना करते हुए शिक्षा और स्वास्थ्य पर कम खर्च को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत अगर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है तो शिक्षा और हेल्थकेयर में सरकारी निवेश बढ़ाना जरूरी है।
गुप्ता ने वित्त मंत्री को लगातार नौवां बजट पेश करने पर बधाई दी और बजट को स्थिरता तथा निरंतरता का प्रतीक बताया। उन्होंने 4.3 प्रतिशत के अनुमानित राजकोषीय घाटे और 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत व्यय को सकारात्मक कदम बताया। टैक्स सुधार, फार्मा सेक्टर को समर्थन और महिलाओं के लिए योजनाओं के बढ़े आवंटन की भी प्रशंसा की।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा पर कुल खर्च जीडीपी के 4.1 से 4.6 प्रतिशत के बीच है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में तय 6 प्रतिशत लक्ष्य से कम है। उन्होंने स्कूलों की बढ़ती फीस, पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में स्कूल बंद होने और सरकारी स्कूलों में घटते भरोसे पर चिंता जताई। उन्होंने शिक्षा के व्यावसायीकरण को अनुच्छेद 21ए की भावना के खिलाफ बताते हुए एक स्वतंत्र शिक्षा आयोग बनाने की मांग की।
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हेल्थ बजट बढ़ती आबादी के अनुरूप नहीं
हेल्थकेयर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भारत का खर्च लगभग 1.9 प्रतिशत जीडीपी है, जो बढ़ती आबादी और बीमारियों के बोझ को देखते हुए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि कमजोर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था लोगों को जेब से ज्यादा खर्च करने को मजबूर करती है। आयुष्मान भारत के तहत कवरेज बढ़ाने और अस्पतालों को टैक्स प्रोत्साहन देने की मांग भी रखी।
गुप्ता ने वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स व किराए में राहत, एमएसएमई के लिए मजबूत डेवलपमेंट बैंक और महिलाओं के लिए संरचनात्मक सुधारों की जरूरत बताई।
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सेकीमंडक्टर लेबोरेटरी के लिए मांगा पैकेज
पंजाब के संदर्भ में उन्होंने मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र से 10,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की। उन्होंने कहा कि यह केवल पंजाब नहीं बल्कि देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता का सवाल है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि आर्थिक नीतियों का वास्तविक प्रभाव तभी दिखेगा जब उसका लाभ आम लोगों तक पहुंचे।
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