लखीसराय सदर अस्पताल।
संवाद सहयोगी, लखीसराय। जिले के सरकारी अस्पतालों में साफ-सफाई मद में प्रतिमाह लाखों रुपये की कथित अनियमितता एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि स्थानीय विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में आउटसोर्स एजेंसी को वास्तविक क्षेत्र से कहीं अधिक क्षेत्र दिखाकर भुगतान किया जाता रहा।
दैनिक जागरण ने 2 और 4 दिसंबर 2023 को इस मामले पर खबरें प्रकाशित की थीं, लेकिन विभागीय स्तर पर ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई। जानकारी के अनुसार, मेसर्स ब्रजेश कुमार को सदर अस्पताल सहित जिले के 32 स्वास्थ्य संस्थानों में सफाई कार्य का जिम्मा दिया गया था। एजेंसी को कुल 1,97,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र दिखाकर प्रतिमाह 28 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया जाता रहा।
सदर अस्पताल का क्षेत्रफल 98,866.6 वर्गमीटर दर्शाते हुए 14.18 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से 14,01,928 रुपये प्रतिमाह भुगतान हुआ। लेकिन 16 जुलाई 2025 से सफाई कार्य जीविका को सौंपे जाने के बाद बीएमएसआइसीएल के इंजीनियर से दोबारा मापी कराई गई, जिसमें वास्तविक क्षेत्र केवल 39,985 वर्गमीटर पाया गया।
इस आधार पर एजेंसी को लगभग 5,66,987 रुपये प्रतिमाह का भुगतान ही उचित था। अनुमान है कि 30 माह में दो करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान किया गया। सदर अस्पताल में जीविका के जिम्मा सफाई कार्य लेने के बाद अनियमितता पर रोक लगी है, लेकिन जिले के बाकी 31 स्वास्थ्य संस्थानों में पुराने पैटर्न पर भुगतान जारी होने की सूचना है।
मामले पर सिविल सर्जन डा. जय प्रकाश सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। विशेषज्ञों और स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पूर्व में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद कार्रवाई न होना विभागीय अधिकारियों और अस्पताल प्रबंधन के मेलजोल को उजागर करता है। अब सवाल यह है कि क्या संबंधित जिम्मेदारों पर जल्द कोई कार्रवाई होगी, और क्या जिले के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी इस घोटाले को रोकने के लिए सतर्क कदम उठाए जाएंगे। |