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कर्तव्य पथ पर बेटे ने निभाया राष्ट्रधर्म, मां बोली- मेरा सपना हुआ पूरा; मेजर हितेश ने किया स्वेदशी युद्धक टैंक का नेतृत्व

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निशांत यादव, लखनऊ। छावनी के सदर बाजार के मंगल पांडेय रोड के मेजर हितेश मेहता का नाम लेते हुए हर कोई आज गर्व महसूस कर रहा है। उनके स्वागत में स्थानीय निवासियों ने रात भर सड़कों को होर्डिंग से भर दिया।

ऐसा हो भी क्याें न आखिर मेजर हितेश मेहता ने 77वें गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में टी-90 के समानांतर ही अपने अर्जुन टैंक का नेतृत्व करते हुए राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने सलामी जो दी। इस क्षण को देख मां रीता विवेक मेहता भावुक हो उठती हैं। वह कहती हैं कि बेटा मुझे आप पर गर्व है। आप यह कर सकते हो, ऐसा मुझे विश्वास था। आज मेरा सपना पूरा हो गया।

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75 आर्म्ड रेजीमेंट के मेजर हितेश मेहता ने स्वदेशी टैंक अर्जुन एमके-1 के साथ कर्तव्य पथ पर अपना जलवा दिखाया। मेजर हितेश की इस उपलब्धि को देखने के लिए छावनी के लोग सुबह से ही टेलीविजन के सामने बैठ गए। मेजर हितेश की मां रीता बताती हैं कि जब 1999 में वह जब कारगिल युद्ध के समाचार देखकर कहता था कि एक दिन मैं भी देश की रक्षा करूंगा।

देश के पहले राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद की जयंती वाले दिन ही हितेश तीन दिसंबर 1993 को जन्म लिया था। चिल्ड्रेन अकादमी माल एवेन्यू से पढ़ाई के बाद हितेश ने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीकाम किया। इसी लखनऊ विश्वविद्यालय से मैने और मेरी बेटी ने पढ़ाई की थी।

सीडीएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर सेना में बने अफसर  

पिता विवेक मेहता की 25 सितंबर 2014 को मृत्यु हाे गई। हितेश मेहता ने अपनी कड़ी लगन के साथ सीडीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की और फिर सेना में अफसर बन गए। यह भी मेरे लिए एक सरप्राइज ही था। आर्म्ड रेजीमेंट में कमीशंड मिलने के बाद से मेजर हितेश अग्रिम माेर्चे पर तैनात होकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

वह दिसंबर 2025 में लखनऊ आए थे। उनकी दादी की आशा मेहता का देहांत हो गया था। आज उनकी दादी होती तो बहुत खुश होती। उस समय इंडिगो एयरलाइन की उड़ानों के निरस्त होने का संकट था। अंत्येष्टि के बाद मेजर हितेश 16 दिसंबर को वापस लौट गए। उनको कर्तव्य पथ की परेड को लेकर तैयारी करना था।

बेटे को मेक इन इंडिया के प्रतीक एमबीटी अर्जुन टैंक का नेतृत्व करते देख मां रीता कहती हैं कि बेटे ने उस स्वदेशी टैंक अर्जुन का नेतृत्व किया है जो पहली बार अपने नए रूप में कर्तव्य पथ पर उतरा है। मेजर हितेश के एक चैनल को दिए इंटरव्यू के मुताबिक आपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन से सुरक्षा के लिए इस टैंक में कई उपाय किए गए हैं।
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