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यूरोपीय संघ का दस्ता भी कर्तव्य पथ की परेड में शामिल हुआ था
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड की भव्यता दुनिया ने देखी। गणतंत्र दिवस की परेड में 30 झांकियां निकाली गईं। इनमें 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकिया थीं। वहीं, 13 झांकियां अलग-अलग मंत्रालयों की देखने को मिली।
148 गर्ल्स कैडेट वाले NCC दल ने भी कर्तव्य पथ पर मार्च किया। उत्तराखंड डायरेक्टोरेट सीनियर विंग गर्ल्स की कमांडर सीनियर अंडर ऑफिसर मानसी विश्वकर्मा ने इस मार्च का नेतृत्व किया था। यूरोपीय संघ का दस्ता भी कर्तव्य पथ की परेड में शामिल हुआ था।
इस बार परेड में कई बदलाव भी किए गए थे:
- गणतंत्र दिवस की परेड में पहली बार दो चीफ गेस्ट पहुंचे थे। यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।
- सीआरपीएफ की एक पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व पहली बार महिला अधिकारी ने किया। सहायक कमांडेंट सिमरन बाला को इसी जिम्मेदारी मिली थी।
- पहली बार भारतीय सेना का पशु दस्ता इतने बड़े और शानदार अंदाज में परेड का हिस्सा बना। पशुओं के इस खास दस्ते में चार शिकारी पक्षी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 10 भारतीय नस्ल के सेना के कुत्ते और 6 पारंपरिक सैन्य कुत्ते भी शामिल हुए। दो बैक्ट्रियन ऊंट और जांस्कर पोनी ने भी परेड में कदमताल किया।
- इस बार परेड में भैरव लाइट कमांडो को भी शामिल किया गया। अक्टूबर 2025 गठित इस बटालियन के लिए कर्तव्य पथ पर शौर्य दिखाने का यह पहला मौका था।
- परेड में पहली बार सैनिकों, हथियारों और सैन्य इकाइयों को वास्तविक युद्ध जैसी स्थितियों में दिखाया गया। इसे बैटल एरे डिस्प्ले कहते हैं।
- पहली बार थल सेना, नौसेना और वायु सेना की अलग-अलग झांकी की बजाय संयुक्त झांकी दिखाई गई।
- इस बार दर्शक दीर्घा के नाम ने भी चर्चा बटोरी। अब तक इन्हें गैलरी-1, गैलरी-2 जैसे नामों से जाना जाता था। लेकिन पहली बार इनका नाम बदला गया और उसे गंगा, यमुना और गोदावरी नदियों का नाम मिला।
- पहली बार परेड में भारतीय सिनेमा को समर्पित झांकी भी प्रस्तुत की गई। इसका नेतृत्व निर्देशक संजय लीला भंसाली ने किया।
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