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सच्चे अर्थों में भारत बनाने के लिए प्रत्येक युवा घर से निकले, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह ने किया आह्वान

LHC0088 3 hour(s) ago views 342
  

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसवाले ने एमएनएनआइटी में युवाओं से संवाद किया। सौ.संगठन



जागरण संवाददाता, प्रयागराज। राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आत्मसात करें। भारत को सच्चे अर्थों में भारत बनाने के लिए प्रत्येक युवा घर से बाहर निकले। यह आह्वान रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसवाले ने किया।

वह मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के एमपी हाल में युवा विद्यार्थी सम्मेलन एवं संवाद कार्यक्रम में मेडिकल कालेज, ट्रिपल आइटी, एमएनएनआईटी तथा विभिन्न महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय से आए विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे।

सरकार्यवाह ने कहा, देश हमें सबकुछ देता है, हम भी तो कुछ देना सीखें। यह हम सब का मूल मंत्र होना चाहिए। देश को लेकर दृष्टि सही रखें। भारत महान था या नहीं, अब इसे नहीं सोचना। भारत को महान कैसे बना सकते हैं, इस पर विचार करें। सभी महापुरुषों ने ऊंच नीच का भेद छोड़ने के लिए कहा है।

उद्योग, व्यापार, शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में भारतीयता दिखनी चाहिए। हमारी सांस्कृतिक एकता महत्वपूर्ण है। पर्यावरण की रक्षा करने के साथ भावी पीढ़ी को अच्छा नागरिक बनाना हम सब का कर्तव्य है। भारत की ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना है।

नई पीढ़ी अपने कर्तव्यों के बारे में दृढ़ प्रतिज्ञ हो। राष्ट्र व समाज के लिए बातें सुनने में अच्छी लगती हैं, करने में कठिनाई होती है। बोलने में अच्छी लगती है परंतु स्वीकार करने में कठिनाई होती है। इस सच को स्वीकारना होगा। जब हम इसे मान लेंगे, लक्ष्य भी प्राप्त कर लेंगे।

सरकार्यवाह ने देश की नीति की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए विभीषण का उदाहरण दिया। कहा, श्रीराम ने लंका विजय के बाद विभीषण को वहां का राज्य दिया और अयोध्या आ गए। इसी संस्कृति को आज भी हम लेकर चल रहे हैं।

भारत ने कभी किसी राष्ट्र का दमन करने के लिए अपने को विकसित नहीं किया। वह अपनी संस्कृति में सहजता, सरलता एवं संभाव रखते हुए, सभी का आदर करना चाहता है। कई संस्कृतियां हममें विलीन हो गईं, यही भारत की महत्ता है। भारत अपने ज्ञान व अनुभव को बांटने के लिए जाना जाता है।

धर्मपाल की प्राइड आफ इंडिया पुस्तक में भारत की शिक्षा प्रणाली, पंचायत व्यवस्था एवं संस्कृति की अभिव्यक्ति पर व्याख्या की गई है, परंतु कुछ लोग फिल्मों के जरिए भ्रम फैलाते हैं कि आर्य बाहर से आए। सच्चाई यह है कि आर्य भारत के हैं। वह यहां की संस्कृति के उत्थान के लिए सतत प्रयास करते रहे।

आयोजन की अध्यक्षता एमएनएनआइटी के निदेशक प्रो. रमाशंकर वर्मा ने की। उन्होंने कहा, इस तरह के युवा संवाद से युवकों का चिंतन राष्ट्रोन्मुखी हो जाता है। मंच पर सह प्रांत संघ चालक प्रो. राणा कृष्ण पाल, ट्रिपलआईटी के निदेशक मुकुल यश सुतावडे मौजूद रहे।

आयोजन की शुरुआत भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। विषय प्रवर्तन विभाग कार्यवाह डा. संजय, मंच संचालन डा. अजय ने किया। इस मौके पर स्वांत रंजन, अनिल कुमार, युद्धवीर, रमेश, डा. मुरारजी त्रिपाठी, आलोक मालवीय आदि मौजूद रहे।

शहर को स्वच्छता के शिखर पर ले जाने की मिली प्रेरणा

संवाद कार्यक्रम में युवाओं को राजनीति, धर्म, संस्कृति, अध्यात्म सहित सभी बिंदुओं पर मार्गदर्शन मिला। संघ के सरकार्यवाह ने कहा, स्वतंत्रता के लिए लाल, बाल, पाल ने आगे बढ़कर स्वयं को देश के लिए समर्पित किया। इस मौके पर आंतरिक सुरक्षा के विषय को भी उठाया गया।

इंदौर का उदाहरण देकर प्रयागराज को स्वच्छता के शिखर पर ले जाने की प्रेरणा भी मिली। साफ शब्दों में सचेत किया कि यदि लालसा और उपभोग में फसेंगे तो पुरुषार्थ का सही प्रयोग नहीं कर सकेंगे। याद रखना होगा राष्ट्र प्रथम है।

राजगोपालाचारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पुस्तक में पर कैपिटा इनकम की जगह पर कैपिटा करेक्टर की प्रेरणा दी गई है। इस दौरान नवाचार के लिए भी प्रेरित किया गया।

सरकार्यवाह ने साफ शब्दों में कहा, जब तक खंडित भारत एक ना हो जाए, तब तक हमारी साधना चलेगी। संयुक्त परिवार के विखंडन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, हमें पूरे परिवार के साथ अवश्य बैठना होगा। देश के नवनिर्माण में यह कदम सहायक है। विभिन्न कालेजों के छात्रों ने जिज्ञासा सत्र में अपनी आशंकाओं का समाधान भी किया।
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