दावोस में JHARKHAND PAVILION का उद्घाटन करते हुए टीम सोरेन
जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड सरकार ने पहली बार चेंबर प्रतिनिधियों को अपने दल में शामिल कर वैश्विक मंच पर अपनी बात रखने के लिए ले गई थी। चेंबर के दो पदाधिकारी रविवार को दावोस से लौट आए हैं।
चेंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा कहते हैं कि दावोस में आयोजित World Economic Forum की वार्षिक बैठक में भाग लेना झारखंड के लिए वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक, औद्योगिक और निवेश क्षमताओं को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने का एक ऐतिहासिक अवसर रहा।
यह मंच न केवल वैश्विक विचार-विमर्श का केंद्र है, बल्कि भविष्य की आर्थिक नीतियों और औद्योगिक दिशाओं को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि इस यात्रा से संभावना के द्वार खुले हैं और झारखंड में आने वाले दिनों में निवेश भी होगा और यहां की तकदीर भी बदलेगी।
हमने इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर विश्व के नीति-निर्माताओं, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व, वैश्विक निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान पाया कि झारखंड जैसे क्रिटिकल मिनरल रिच राज्य की भूमिका आने वाले वर्षों में वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रही है।
विशेष रूप से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन स्टील जैसे उभरते क्षेत्रों में झारखंड की रणनीतिक उपयोगिता को लेकर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिला।
लोकल से ग्लोबल वैल्यू चेन पर चर्चा
चेंबर अध्यक्ष कहते हैं कि दावोस में एमएसएमई सेक्टर, स्टार्टअप इकोसिस्टम, स्किल डेवलपमेंट और लोकल से ग्लोबल वैल्यू चेन के एकीकरण पर भी गंभीर चर्चा हुई।
झारखंड में एमएसएमई और स्थानीय उद्यमिता को वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जोड़ने की व्यापक संभावनाएं हैं, जिससे रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिल सकती है।
दावोस से यह स्पष्ट संदेश उभरकर आया कि झारखंड के औद्योगिक भविष्य को साकार करने के लिए सरकार, उद्योग, निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच निरंतर संवाद और सहयोग आवश्यक है।
झारखंड चेंबर राज्य के व्यापार, उद्योग और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।
इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा
चेंबर महासचिव रोहित अग्रवाल कहते हैं कि दावोस में आयोजित फोरम में भाग लेना मेरे लिए एक अत्यंत समृद्ध और सीखने वाला अनुभव रहा।
इस वैश्विक मंच पर विभिन्न देशों के नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, विचारकों और नवाचारकर्ताओं के साथ संवाद का अवसर मिला, जिससे कई नए दृष्टिकोण समझने को मिले।
यात्रा के दौरान सस्टेनबिलिटी के महत्व पर विशेष बल दिया गया। यह स्पष्ट हुआ कि आने वाला वैश्विक व्यापार केवल लाभ तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पर्यावरण, समाज और दीर्घकालिक जिम्मेदारी को केंद्र में रखकर ही आगे बढ़ेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर हुई चर्चा ने यह दर्शाया कि तकनीक आने वाले समय में उद्योगों की कार्यप्रणाली, रोजगार की प्रकृति और निर्णय प्रक्रिया को पूरी तरह बदलने जा रही है। एआई के साथ-साथ एथिकल यूज और ह्यूमन सेंट्रक एप्रोच पर भी गंभीर विमर्श हुआ।
क्लाइमेट चेंज और उसका वैश्विक व्यापार पर प्रभाव एक प्रमुख विषय रहा। जलवायु परिवर्तन न केवल पर्यावरणीय संकट है, बल्कि यह आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य उत्पादन और निवेश निर्णयों को भी सीधे प्रभावित कर रहा है।
सरकार और उद्योगों को मिलकर करना होगा काम
इससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकारों और उद्योगों को मिलकर समन्वित समाधान अपनाने होंगे। इसके अतिरिक्त, भू-राजनीतिक परिदृश्य, वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा संक्रमण, ग्लोबल सप्लाई चेन का पुनर्गठन और उभरते बाजारों की भूमिका जैसे विषयों पर भी गहन चर्चा हुई।
दावोस से यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर आया कि भविष्य का वैश्विक विकास साझेदारी, इनोवेशन और रिस्पांसिबल लीडरशिप पर आधारित होगा। भारत और झारखंड जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए यह एक बड़ा अवसर है कि हम वैश्विक बदलावों के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ें। |