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देवघर में गेमिंग एप ठगी गिरोह का भंडाफोड़, दुबई से जुड़े हैं तार; जनधन एकाउंट का होता है इस्तेमाल

Chikheang 2026-1-25 16:28:03 views 1236
  

पुलिस की गिरफ्त में चारों आरोपित। (जागरण)



कंचन सौरभ मिश्रा, देवघर। शहर के बरमसिया मोहल्ले में एक मकान पर किराए पर रहकर साइबर ठगी का धंधा संचालित करने के आरोप में चार आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था।

इन आरोपितों से पूछताछ के क्रम में पता चला कि ये लोग विभिन्न विभिन्न प्रकार की ऑनलाइन गेमिंग एप की मदद से लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। ये लोग ठगी के लिए महादेव एप, डायमंड एक्सचेंज, हिटमैन बुक, लोटस बुक गेमिंग एप की मदद से तीनपत्ती, अंदर बाहर, रम्मी सर्किल, जेटेक्स, क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, हार्स रेसिंग, पालेटिक्स, कब्ड्डी, इंटरनेशनल कैसिनो, वॉलीबॉल आदि गेम में लोगों का पैसा लगवा कर ठगी करते हैं।

इन लोगों ने मुंबई में बैठे विक्की कुमार नामक युवक का नाम बताया था। उनके मुताबिक उसे इशारे पर ये लोग ये धंधा संचालित करते थे। लेकिन जानकार सूत्र बताते हैं कि असल में इस अवैध धंधे के तार देश की सीमा के पार दुबई से जुड़े हुए हैं।

वहां से भारत में गेमिंग एप के जरिए अवैध रूप से सट्टेबाजी का धंधा संचालित किया जाता है। क्योंकि दुबई में सट्टेबाजी पर राेक नहीं है। सरगना वहां से ही इस धंधे को यहां कंट्रोल करता है। पैसे पर पढ़े लिखे बेरोजगार युवकों को महीने के तनख्वाह व कमीशन देकर स्टाफ के तौर पर रखा जाता है। उन्हें पहले इस खेल के बारे में जानकारी दी जाती है।

यूजर आईडी व पासवर्ड दिया जाता है। इन्हें ठगी का पैसा मंगाने के लिए बैंक का खाता उपलब्ध कराया जाता है। इतना ही नहीं इस युवाओं को किराए पर कमरा, मोबाइल, लैपटॉप भी उपलब्ध कराया जाता है।

ये साइबर ठग लोगों से सट्टे में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। पैसा लेकर गेम खेलने के लिए उनके वॉलेट को रिचार्ज किया जाता है। इस अवैध खेल की कमाई में से बड़ा हिस्सा दुबई तक पहुंचता है।
जनधन के खाता का होता है इस्तेमाल

ये भी जानकारी मिली है कि इसके लिए पैसा के लेनदेन के लिए जनधन खाता का इस्तेमाल किया जाता है। इस काम के लिए एक अलग नेटवर्क काम करता है। ये लोग गरीब लोगों से उनका जनधन का खाता एक तरह से खरीद लेते हैं या फिर उसे किराए पर ले लेते हैं।

पैसा देकर वे उन लोगों का बैंक खाता व डेबिट कार्ड अपने पास रख लेते हैं। कुछ पैसा के लालच में भोले-भाले गरीब अपना बैंक खाता इन लोगों को दे देते हैं। ऐसे में पुलिस के लिए इन खाता धाराओं का पता लगाना आसान नहीं होता। उस खाता का इस्तेमाल ठगी के पैसा के लेनदेन के लिए किया जाता है।

बैंक खाता इकट्ठा करने वाला गिरोह बंगाल के ग्रामीण व पिछड़े इलाकों में काफी सक्रिय है। इन एजेंटों को खाता का जुगाड़ करने के लिए कमीशन के तौर पर पैसा दिया जाता है।
बांका जिले के युवा गेमिंग एप ठगी के धंधे में हैं सक्रिय

बांका जिला के कई इलाके के बड़ी संख्या युवा इस धंधे में शामिल हैं। बताया जाता है कि यहां के सुईया व कटोरिया थाना क्षेत्र के करीब 500 युवक साइबर ठगी के धंधे में लिप्त है। सुईया थाना क्षेत्र के भेलवा, बोडा, धनुबसार, अबरक्खा, कटोरिया, थाना क्षेत्र बड़वासनी, तेलंगवा, बाघमारी, जयपुर थाना क्षेत्र के काेल्हाबाद, जमदाहा आदि इलाके के युवा इस अवैध खेल में शामिल हैं। इनमें से अधिकांश युवा गेमिंग एप के अवैध धंधे से जुड़े हुए हैं।

इनमें से कुछ युवकों ने तो दुबई तक की सैर कर ली है। अवैध कमाई की मदद से यहां से पढ़े लिखे बेरोजगार बीपीएल परिवार के युवकों ने पक्का का मकान, दो पहिया व चार पहिया वाहन तक खरीद लिया है। इन युवाओं को इस धंधे में शामिल करने के लिए पहले क्रिकेट के खेल का भी इस्तेमाल किया गया।

शुरु में इस धंधे से जुड़े कुछ युवाओं ने पैसा कमाया और उस अवैध कमाई से इलाके में कई जगह क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया। पैसा की चमक-धमक के चक्कर में धीरे-धीरे यहां के पढ़े लिखे बेरोजगार युवा आ गए और इस अवैध धंधे में फंस गए।

आज इलाके के सैकड़ों युवा इस अवैध धंधे में शामिल हैं। ये लोग झारखंड के देवघर, धनबाद, रांची आदि इलाके में किराए पर मकान, अपार्टमेंट में रहकर ये अवैध धंधा संचालित करते हैं।

पहले भी देवघर के प्रोफेसर कॉलोनी स्थित एक अपार्टमेंट से कटोरिया के पांच युवकों को पुलिस द्वारा पकड़ा गया था। ये लोग यहां रहकर गेमिंग एप के जरिए सट्टेबाजी के तहत ठगी का धंधा संचालित करते थे। इनकी गिरफ्तारी के बाद धनबाद से भी कटोरिया इलाके ही ही दो युवक पकड़े गए थे।
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