जवान की मौत के बाद घर में विलाप करती महिलाएं। जागरण
जागरण संवाददाता , हापुड़। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में बृहस्पतिवार को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में भारतीय सेना का बुलेटप्रूफ ट्रक भदरवाह–तंबा अंतरराज्यीय मार्ग पर अनियंत्रित होकर लगभग 200 फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस भीषण दुर्घटना में देश की सेवा करते हुए दस जवान बलिदानी हो गए, जबकि 11 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे में शहीद हुए जवानों में हापुड़ के हाफिजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम भटैल के सैनिक रिंखिल बालियान भी शामिल हैं।
जैसे ही यह सूचना गांव पहुंची, स्वजन में कोहराम मच गया। बलिदानी के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लग गया और पूरे गांव में मातम छा गया। हर आंख नम थी और हर जुबां पर बस एक ही बात गांव ने अपना वीर सपूत खो दिया। सभी बलिदानी के शव आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। समाचार लिखे जाने तक शव गांव में नहीं पहुंचा था।
वीर सपूत के स्वजन ने बताया कि रिंखिल बालियान वर्ष 2016 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वह एक अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठ और साहसी सैनिक के रूप में जाने जाते थे। वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में 72 आर्मर्ड रेजिमेंट में थी। हादसे के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त कर ली।
बलिदानी जवान की मां मंजू देवी और पत्नी रिंकी का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित परिवार को संभालना मुश्किल हो रहा है। गांव की महिलाएं और रिश्तेदार लगातार उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं। डीएम अभिषेक पांडेय व एसपी ज्ञानंजय सिंह भी जवान के स्वजन से मिलने पहुंचे।
पति की मौत के बाद बच्चों को गोद में लिए बदहवास हालत में बैठी जवान की पत्नी। जागरण
पांच वर्ष पहले हुई थी शादी
बलिदानी रिंखिल की शादी करीब पांच वर्ष पूर्व रिंकी से हुई थी। उनके परिवार में तीन वर्ष की एक बेटी वास्तिका उर्फ जस्सू और एक वर्ष का बेटा राघव है, जो अभी अपने पिता की शहादत का अर्थ भी नहीं समझ सकते। वहीं जवान के पिता का देहांत हो चुका है। वह भी भारतीय सेना में थे। मां मंजू गृहणी हैं वहीं, छोटा भाई ऋषभ बालियान भी भारतीय सेना में सेवारत है। सभी को बिलखता देखकर हर किसी की आंखें नम कर दीं। एक ही परिवार के दो जवानों का देश सेवा में होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात मानी जा रही है।
आखिरी बार मां से की थी बात
जवान के भाई ऋषभ ने बताया कि पिता भारतीय सेना में थे। उन्हीं से भाई को सेना में भर्ती होने का जज्बा मिला। 12 वीं कक्षा पास करते ही वह भर्ती की तैयारियां करने लगा था। उसे भी सेना में भर्ती कराने में भाई का ही योगदान है। उसने आखिरी बार मां मंजू से बात की थी। उसने बताया था कि 26 जनवरी को लेकर आपरेशन चलाया जा रहा है। वह अापरेशन में टीम के साथ जाएगा। साथी उसने पत्नी व बच्चों का हालचाल भी पूछा था। किसी को नहीं पता था कि वह हमेशा के लिए सबको छोड़कर चला जाएगा।
जवान के स्वजन से बातचीत करते डीएम व एसपी। जागरण
दोस्त बोले अब किससे बताएं अपना हाल
गांव भटैल के संदीप और दिलशाद ने बताया कि उनकी रिंखिल से गहरी दोस्ती थी। जब भी वह छुट्टी पर आता था तो सबसे पहले उनसे आकर मिलता था। उनकी परेशानी में वह हमेशा उनका साथ देता था। अन्य ग्रामीणों के प्रति भी उसका व्यवहार काफी सरल और मिलनसार था। अब वह किसको अपनी परेशानी बताएंगे।
बोले ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि रिंखिल बालियान की शहादत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश की सीमाओं की रक्षा के लिए हमारे जवान हर समय अपने प्राणों की आहुति देने को तत्पर रहते हैं। गांव भटैल का यह वीर सपूत भले ही आज हमारे बीच न हो, लेकिन उनकी वीरता और बलिदान सदैव याद किया जाएगा।
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