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आगरा में गैंगवार, रंगबाज राज चौहान की गेस्ट हाउस में गोली मारकर हत्या; 10 राउंड फायरिंग से फैली दहशत

cy520520 2026-1-24 00:56:45 views 551
  



जागरण संवाददाता, आगरा। टेढ़ी बगिया स्थित एसएन स्टे गेस्ट हाउस में शराब पार्टी के दौरान रंगबाज राज चौहान की गैंगवार के चलते गोली मारकर हत्या कर दी गई। शुक्रवार रात पहुंचे हमलावरों ने पहले कमरे में गोली चलाई।

राज निकलकर भागा तो दौड़ते समय सीने में गोली मार दी। वह फर्श पर गिर पड़ा। उसके गिरने के बाद भी दूसरे गुट ने कई राउंड फायर किए। हत्यारों ने कहा, तेरा यही अंजाम होना था। इसके बाद तमंचे लहराते हुए फरार हो गए। पुलिस के पहुंचने से पहले ही रंगबाज को छोड़कर उसके साथी भी भाग गए।

पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। हत्या के पीछे वर्चस्व की जंग बताई जा रही है। मूलरूप से हाथरस के बेदई निवासी राज चौहान ट्रांस यमुना कालोनी में किराए पर रहता था।

शुक्रवार रात राज साथियों के साथ गेस्ट हाउस पहुंचा। रात 10.30 बजे सभी कमरे में बैठकर शराब पी रहे थे, तभी आधा दर्जन हथियारबंद युवा आए। उन्होंने कमरे में घुसकर राज चौहान का कालर पकड़ लिया। विरोध होने पर उससे और साथियों से मारपीट की और गोली चला दी।

यह गोली किसी को नही लगी। पुलिस को आसपास के लोगों ने बताया कि बचने को राज चौहान कमरे से निकलकर गेस्ट हाउस की गैलरी में भागा तो हमलावरों ने उसके सीने में गोली मार दी। वह फर्श पर गिर पड़ा। उसके फर्श पर गिरने के बाद भी हमलावरों ने तमंचे से कई राउंड फायरिंग की।

पुलिस ने राज को एसएन मेडिकल कालेज इमरजेंसी पहुंचाया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।डीसीपी सिटी अली अब्बास पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। घटनास्थल पर शराब, बीयर की बोतलें और सिगरेट मिली हैं।

डीसीपी ने बताया कि राज चौहान कमरे में पार्टी कर रहा था। तभी उसकी गोली मारी गई। राज पिछले दिनों ट्रांस यमुना थाने में दर्ज जानलेवा हमले के मामले में जेल गया था। मौके पर 315 बोर के तीन खाली खोखे मिले हैं। सीसीटीवी फुटेज में चार से छह युवक भागते हुए दिखे हैं। उनकी पहचान की जा रही है।
जेल से छूटने पर निकाला था जुलूस

अदालतों से कुख्यातों को भी जमानत मिल जाती, वह फिर जश्न मनाते हैं। दो दिसंबर को जेल से छूटने पर राज ने साथियों के साथ रोड पर जुलूस निकाला था। इस मामले में उसके 10 साथियों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन वह मौके से फरार हो गया था।

सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बावजूद उसकी जमानत निरस्त कराने की कोशिश नहीं की गई। राज चौहान रंगबाज किस्म का था। अपने दादा की हत्या में भी राज चौहान जेल जा चुका था।
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