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UP SIR की नोटिसों पर सुनवाई में मतदाता भेज सकते हैं प्रतिनिधि, ऑनलाइन जवाब भी संभव

Chikheang Yesterday 23:56 views 761
  



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया है कि प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में जिन मतदाताओं को नोटिस जारी की जा रही है।

ऐसे मतदाता स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्यम से सुनवाई में अपना पक्ष रख सकते हैं। सुनवाई के दौरान 13 अभिलेखों में से कोई एक अभिलेख सुनवाई के उपलब्ध कराना होगा।

उन्होंने बताया है कि आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद गणना चरण की अवधि में जिन मतदाताओं के गणना प्रपत्र में दिए गए विवरण के अनुसार मैपिंग विशेष गहन पुनरीक्षण-2003 की मतदाता सूची से नहीं हो पाई है, उन मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने की कार्यवाही शुरू की गई है।

समस्त निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों तथा सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा नोटिस पर सुनवाई की जा रही है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि भारत निर्वाचन आयोग का उद्देश्य ‘कोई मतदाता न छूटे’ के लिए पुनरीक्षण प्रक्रिया को सरल, सुलभ और समावेशी बनाया गया है। मतदाताओं को होने वाली असुविधा कम करने लिए सुनवाई की प्रक्रिया में उन मतदाताओं को अधिकारियों के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दी जा रही है, जो किन्हीं कारणों से सुनवाई में उपस्थित नहीं हो सकते हैं।

ऐसे मतदाता अपनी तरफ से किसी व्यक्ति को सुनवाई में उपस्थित होने के लिए लिखित रूप में हस्ताक्षर कर अथवा अंगूठे का निशान लगाकर अधिकृत कर सकते हैं। मतदाता जिसे अधिकृत करेंगे वह व्यक्ति सुनवाई में मतदाता का प्रतिनिधित्व करेगा।

भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट voters.eci.gov.in पर लागिन करके भी नोटिस की जानकारी हासिल की जा सकती है। आनलाइन ही नोटिस का जवाब दे सकते हैं। मतदाताओं को बीएलओ भी नोटिस दे रहे हैं।

आनलाइन माध्यम से वेबसाइट पर लागिन करके एसआइआर-2026 के अंदर सबमिट डाक्युमेंट्स अगेंस्ट नोटिस इश्यू पर क्लिक करने से एक बाक्स खुलेगा जिसमें वोटर आइडी नंबर टाइप करने पर पता चल जाएगा कि नोटिस जारी हुआ है, अथवा नहीं।

यदि नोटिस जारी हुआ है, तो नया पेज खुलेगा जहां मतदाता को इपिक संख्या या नोटिस संख्या भरने के साथ ही निर्धारित अभिलेखों को अपलोड करना होगा।

जिन मतदाताओं का जन्म एक जुलाई, 1987 से पूर्व हुआ है, उन्हें केवल स्वयं से संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करना होगा। जिन मतदाताओं का जन्म एक जुलाई 1987 के बाद और दो दिसंबर 2004 के मध्य हुआ है।

उन्हें स्वयं का तथा अपने पिता या माता में से किसी एक के अभिलेख प्रस्तुत करना होगा। मतदाता का जन्म दो दिसंबर 2004 के बाद हुआ है, तो उसे स्वयं के साथ-साथ अपने माता और पिता दोनों के ही अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे।

रिणवा ने बताया है कि नोटिस के जवाब में मतदाता स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्यम से अपना, पिता, माता की जन्मतिथि और जन्म स्थान के प्रमाण के रूप में 13 अभिलेखों में से कोई एक अभिलेख उपलब्ध करा सकते हैं।
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