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नकली सिरप कांड में अब प्रिंटिंग प्रेस की बारी! ड्रग इंस्पेक्टर की छापेमारी से हड़कंप, खुलेगा रैपर छपाई का काला चिट्ठा

Chikheang 2026-1-23 21:57:31 views 933
  

पूरनपुर प्र‍िंंट‍िंंग प्रेस  



जागरण संवाददाता, पीलीभीत। घुंघचाई थाना पुलिस ने नकली कफ सिरप बनाकर बिक्री करने के आरोपित पूरनपुर थाना क्षेत्र के गांव लाह निवासी सुरेश कुमार को तीन दिन पहले गिरफ्तार करक भले ही जेल भेज दिया हो, लेकिन उसके इस कांड में जाने-अनजाने सहयोग करने वालों के विरुद्ध भी कार्यवाही की जा रही है।

नकली कफ सिरफ खरीदने और अन्य दवाएं बिक्री करने के आरोपित मेडिकल स्टोर संचालकों की जांच करने के बाद अब प्रिंटिंग प्रेस पर जाकर औषधि निरीक्षक ने जांच की। जिले में नकली कफ सिरप का उत्पादन करने के साथ ही धड़ल्ले से बिक्री भी किए जा रहे हैं। इसके साथ ही नियमों के विपरीत मेडिकल स्टोर संचालक बिना डाक्टर के पर्चे के दवाइयां बिक्री करते रहते हैं।

नकली कफ सिरप बनाने और बिक्री करने की पुष्टि घुंघचाई थाना पुलिस की तीन दिन पहले की गई कार्रवाई कर दी गई। पुलिस ने पूरनपुर थाना क्षेत्र के गांव लाह निवासी नकली कफ सिरप बनाकर बिक्री करने के आरोपित सुरेश कुमार को तीन दिन पहले गिरफ्तार किया था। आरोपित के पास टोपेक्स गोल्ड और कोयोरक्स-टी की 375 कफ सिरप की शीशियां मिलीं।

यही नहीं, कफ सिरप बनाने में प्रयुक्त सामान 488 नई खाली शीशी बिना ढक्कन, 110 रैपर, 1,939 ढक्कन, स्प्रिट भरी तीन शीशियां भी मिलीं थीं। आरोपित मेडिकल स्टोर संचालकों के साथ ही नशेड़ियों को नकली कफ सिरप सप्लाई करता था। नकली कफ बनाने के लिए रैपर को छपवाने की जरूरत पड़ती थी।

सहायक आयुक्त औषधि, बरेली मंडल के निर्देश पर औषधि निरीक्षक नेहा वैश्य ने शुक्रवार को पूरनपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस पर जांच की। नेहा वैश्य का कहना है कि आरोपित ने पूरनपुर प्रिंटिंग प्रेस ने दो बार रैपर छपवाए थे। वह करीब छह माह पहले आया था। इसके बाद तीन माह पहले भी रैपर छपवा ले गया, लेकिन तीसरी बार मामला संदिग्ध लगने पर उन्होंने पर्चे छापने से मना कर दिए। हालांकि, इससे संबंधित दस्तावेज वह नहीं दिखा पाए। औषधि निरीक्षक ने उनके यहां के कुछ अभिलेखों छायाप्रतियां भी ली हैं।

  


पूरनपुर प्रिटिंग प्रेस पर जाकर रैपर छपवाने के संबंध में जांच की की थी। सभी प्रिटिंग प्रेस संचालकों को निर्देश गए कि दवाओं से संबंधित किसी तरह का रैपर अगर कोई छपवाए तो इसकी सूचना औषधि विभाग को अनिवार्य रूप से दें।

- नेहा वैश्य, औषधि निरीक्षक





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