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बजट में मिले रोजगार सृजन को प्राथमिकता, फिक्की के सर्वे में शामिल लोगों की मांग

LHC0088 3 hour(s) ago views 761
  

फिक्की के सर्वे में शामिल लोगों ने की ये मांग। (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उद्योग संगठन फिक्की द्वारा गुरुवार को जारी सर्वे में कहा गया है कि बढ़ते वैश्विक तनाव को देखते हुए सरकार को बजट में रोजगार सृजन को बढ़ावा देने और निर्यात को मजबूत मदद के उपायों को प्राथमिकता देनी चाहिए। सर्वे में शामिल उद्योग जगत के आधी प्रतिभागियों को उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष यानी 2026-27 में आर्थिक वृद्धि सात से आठ प्रतिशत के दायरे में रहेगी।

वहीं 80 प्रतिशत प्रतिभागियों ने वृद्धि की संभावनाओं की उम्मीद जताई है, जिससे लगातार वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के मध्यम अवधि फंडामेंटल पर भरोसा और पक्का हुआ है। यह सर्वे दिसंबर 2025 के आखिर और जनवरी 2026 के बीच किया गया है। नतीजे अलग-अलग सेक्टर की लगभग 100 कंपनियों के जवाब पर आधारित है।
सर्वे में क्या मांग की गई?

प्रतिभागियों ने बजट में निर्यात प्रतिस्पर्धा को बेहतर बनाने के लिए आरओडीटीईपी (रिमिशन आफ ड्यूटीज एंड टैक्सेस आन एक्सपोर्टेड प्रोडक्ट्स) के तहत आवंटन बढ़ाने की मांग की है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि बजट में एसईजेड से जुड़ी नीतियों में सुधार और सीमा शुल्क को और तर्कसंगत किया जा सकता है। सर्वे में शामिल कंपनियों ने प्रत्यक्ष कर अनुपालन को आसान बनाने, डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने, तेजी से विवाद सुलझाने के उपायों की भी मांग की है।
तीन प्राथमिकताएं आईं सामने

सर्वे के आधार पर बजट के लिए तीन व्यापक आर्थिक प्राथमिकताएं साफ तौर पर सामने आती हैं। इसमें रोजगार सृजन, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर लगातार जोर देना और निर्यात को ज्यादा मदद प्रदान करना। फिक्की ने कहा कि जिन सेक्टर पर फोकस रहने की उम्मीद है, उसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा और एमएसएमई जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देना जारी रखे सरकार

सर्वे में शामिल कंपनियों ने राजकोषीय समझदारी के महत्व पर भी जोर दिया है। लगभग 42 प्रतिशत प्रतिभागियों को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.4 ‌प्रतिशत के बराबर रहेगा।

प्रतिभागियों ने कहा कि सरकार को मैन्युफैक्चरिंग और पूंजीगत खर्च पर जोर देना जारी रखना चाहिए। उन्होंने डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के उपायों पर भी उतना ही ध्यान देने की मांग की, जिसमें रक्षा आवंटन में पूंजीगत परिव्यय को 30 प्रतिशत तक बढ़ाकर पहले पंक्ति में शामिल रहने वाले हथियारों का आधुनिकीकरण करना शामिल है। इसके अलावा, ड्रोन पीएलआई परिव्यय को भी बढ़ाने का सुझाव दिया है।

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