डासना स्थित जिला कारागार। जागरण
विनीत कुमार, गाजियाबाद। अच्छे आचरण और कारागार में बेहतर कार्य के आधार पर सजा काट रहे बंदियों की समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया ऑनलाइन होने जा रही है। इससे फाइलों की आवाजाही में पारदर्शिता बढ़ेगी और निर्णय भी तय समयसीमा में होगा। नई व्यवस्था के तहत जिला स्तर से लेकर राज्यपाल कार्यालय तक पूरी कार्यवाही डिजिटल माध्यम से भेजी जाएगी और पूरी प्रक्रिया के लिए अधिकतम 120 दिन की समयसीमा निर्धारित की गई है। इससे पहले कोई तय समयसीमा नहीं थी। इस कारण कई मामलों में फाइल एक साल से अधिक समय तक लंबित रहती थी।
बंदियों को समय पर राहत मिल सकेगी
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 18 फरवरी 2025 के आदेश के अनुपालन में संशोधित गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत जेल अधीक्षक हर वर्ष 1 जनवरी, 1 मई और 1 सितंबर को स्वत: पात्र बंदियों की फाइल शुरू करेंगे, जो अगले चार माह में पात्र होने वाले होंगे। इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए कारागार मुख्यालय में एक नोडल अधिकारी भी नामित किया जाएगा। जिला कारागार गाजियाबाद के अधीक्षक सीताराम शर्मा ने बताया कि नई व्यवस्था से अनावश्यक देरी रुकेगी और योग्य बंदियों को समय पर राहत मिल सकेगी।
बंदी को पुनर्विचार का अधिकार मिलेगा
उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रैकिंग से हर स्तर पर जवाबदेही तय होगी। नई गाइडलाइन के अनुसार परामर्श समिति बंदी के अपराध की प्रकृति, आचरण, पुनर्वास की संभावना और पीड़ित पर प्रभाव को देखकर सशर्त रिहाई की सिफारिश कर सकती है। यदि रिहाई से इनकार होता है तो कारण लिखित में देना होगा और बंदी को पुनर्विचार का अधिकार मिलेगा।
हत्या के दोषी की रिहाई में लगा था समय
हाल ही में कारागार प्रशासन ने हत्या के सिद्धदोष बंदी सुहैब उर्फ राजा की समयपूर्व रिहाई का आदेश जारी किया था। उसकी फाइल अप्रैल 2025 में शुरू हुई थी। जबकि आदेश इसी महीने आया है। सोमवार को इस विषय पर दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक भी हुई, जिसमें आनलाइन प्लेटफार्म, टाइमलाइन और निगरानी तंत्र पर चर्चा हुई।
ऐसे अपराधियों को नहीं मिलेगा लाभ
गंभीर अपराधों जैसे आतंकी गतिविधि, सरकारी गोपनीयता, पाक्सो, एनडीपीएस, या पुलिस हिरासत से फरार होने वालों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। तीन से अधिक हत्याओं के दोषियों के लिए न्यूनतम 25 वर्ष की अपारिहार सजा पूरी करना अनिवार्य रहेगा। इनके अतिरिक्त कई अन्य बिंदु भी हैं जिनके पूरा न होने पर बंदी को राहत नहीं मिलेगी।
“इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर साफ्टवेयर भी अंतिम चरण में है। उससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। बंदियों की समयपूर्व रिहाई पर निर्णय में कम समय लगेगा।“
-सीताराम शर्मा, जेल अधीक्षक
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