Vasant Panchami 2026 सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, रुड़की। Vasant Panchami 2026 वसंत पंचमी 23 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग और चतुर्ग्रही योग में पड़ेगी। इस बार वसंत पंचमी का पर्व शुक्रवार के दिन पड़ने से भक्तों को मां सरस्वती के साथ माता लक्ष्मी की भी विशेष कृपा मिलेगी, जबकि शुक्र अस्त होने के कारण इस वसंत पंचमी पर विवाह आदि शुभ मंगल कार्य नहीं हो सकेंगे।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी, श्री पंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से जाना जाता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की परिसर स्थित श्री सरस्वती मंदिर के आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि वसंत पंचमी के दिन वाणी की देवी माता सरस्वती प्रकट हुई थी।
सृष्टि रचना के बाद वाणी की शक्ति जागृत करने के लिए ब्रह्मा ने कमंडल के जल से माता सरस्वती को प्रकट किया था। शास्त्रों में इस दिन को शक्ति के प्राकट्य दिवस के रूप में माना जाता है।
इस वर्ष वसंत पंचमी पर सर्वार्थ सिद्धि व चतुर्ग्रही योग पड़ने से आमजन समेत विद्यार्थी, व्यापारी वर्ग और कला-संगीत आदि क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए बहुत खास रहेगी।
उन्होंने बताया कि वसंत पंचमी के दिन से ही वसंत ऋतु का प्रारंभ होता है और इसी दिन होलिका स्थल पर पूजन करके उपले रखने की भी परंपरा है। इसी दिन से होलिका पर्व की शुरुआत हो जाती है।
31 जनवरी को शुक्र ग्रह होगा उदय, प्रारंभ होंगे शुभ कार्य
आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि शास्त्र के अनुसार वसंत पंचमी को सिद्ध दिवस के रूप में माना जाता है, लेकिन इस वर्ष शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण विवाह, उपनयन, यज्ञोपवीत, मुंडन, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्यों का निषेध रहेगा।
यानी इस वर्ष वसंत पंचमी पर मांगलिक कार्य नहीं हो पाएंगे। 31 जनवरी को शुक्र ग्रह के उदय होने के बाद ही शुभ कार्य प्रारंभ होंगे।
पूजन को प्रात: 7:15 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक उपयुक्त समय
वसंत पंचमी के दिन पूजा करने का उपयुक्त समय सुबह सवा सात बजे से दोपहर लगभग 12:30 बजे तक रहेगा। वैसे तो पूरा दिन माता शक्ति की पूजा करने का विधान है, लेकिन उपयुक्त समय में पूजा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
वसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती का पीले पुष्प, पीले चावल, पीले मिष्ठान, पीले वस्त्र से पूजन करना चाहिए। उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए। कला-संगीत से जुड़े लोगों को अपने वाद्य-यंत्रों की पूजा एवं दान आदि करना चाहिए।
विद्यार्थी वर्ग को भी पुस्तक की पूजा एवं दान आदि करना चाहिए। ऐसा करने से विद्या, बुद्धि, सद्बुद्धि व ज्ञान की प्राप्ति होती है।
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