जागरण संवाददाता, पटना। कौशल आधारित रोजगार की दिशा में आगे बढ़ते हुए आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ जा सकता है। बिहार को भी इसमें तेजी से आगे बढ़ना होगा। राज्य में संसाधन और मानव शक्ति की कमी नहीं है। जरूरत है तो सही प्रशिक्षण और अवसरों से जोड़ने की। फुटवियर और चमड़ा उद्योग इस दिशा में बड़ी संभावना बनकर उभर रहा है।
बिहार में पहले भी यह उद्योग मजबूत स्थिति में रहा है। ये बातें सोमवार को दैनिक जागरण कार्यालय, पटना में आयोजित जागरण विमर्श में फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआइ), बिहटा के निदेशक नीरज कुमार ने कहीं।
उन्होंने बताया कि इसमें अपार संभावना है। भारत में प्रति व्यक्ति वर्ष में औसत दो जोड़ी तो अमेरिका आदि देशों में सात जोड़ी से अधिक जूते लोग खरीदते हैं। हम अपने देश की ही बात करें तो जरूरत बहुत बड़ी है। इसके लिए उस स्तर पर निर्माण भी करना होगा, जिसमें मानव संसाधन की भी जरूरत होगी।
इससे समझा जा सकता है कि यह क्षेत्र औद्योगिक रूप से कितना बड़ा है और कितने अवसर हैं। फुटवियर के उत्पादन और खपत में हम विश्व में दूसरे स्थान पर हैं। चीन पहले नंबर पर है। भारत सहित 15 देश चमड़ा उद्योग में लगभग 80 प्रतिशत उत्पाद बनाते हैं।
बिहार में युवाओं की आबादी काफी अधिक है। उन्हें उद्योग से जोड़ने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। एफडीडीआइ बिहटा इसी उद्देश्य से युवाओं को फुटवियर डिजाइन, प्रोडक्शन, फैशन और रिटेल जैसे क्षेत्रों में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह का प्रशिक्षण दे रहा है। सभी पाठ्यक्रम छात्रों को उद्योग के लिए तैयार करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं, जो डिजाइन, विनिर्माण, इंजीनियरिंग, सामग्री विज्ञान और विपणन की गहन समझ प्रदान करते हैं।
जूते हम रोज पहनते हैं, उसके पीछे पूरी टीम, तकनीक और इंजीनियरिंग जुड़ी होती है। इसमें फुट एनाटामी, शरीर का वजन, तापमान, आराम, मजबूती और टिकाऊपन जैसे कई वैज्ञानिक पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।
यही वजह है कि फुटवियर और चमड़ा उद्योग संभावनाओं से भरा क्षेत्र है। बिहार जैसे राज्य, जहां श्रम शक्ति प्रचुर मात्रा में है, इस सेक्टर से बड़ा लाभ उठा सकते हैं। बिहार सरकार भी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जुड़े प्रयासों में सहयोग कर रही है।
चमड़ा उद्योग में संभावनाएं
संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य संजीव कुमार ने कहा कि मुजफ्फरपुर और किशनगंज चमड़ा उद्योग के लिए अत्यधिक संभावनाशील हैं। मुजफ्फरपुर के महवल में 62.17 एकड़ में लेदर प्रोडक्ट पार्क लगभग तैयार है, जहां सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। वहीं किशनगंज में 33.77 एकड़ में सीईटीपी (कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) सहित समर्पित क्षेत्र विकसित किया गया है।
उन्होंने बताया कि चमड़ा मांस उद्योग का बाय-प्रोडक्ट होता है। जानवरों की खाल को पहले नमक से सुरक्षित किया जाता है, ताकि वह खराब न हो। इसके बाद प्रोसेसिंग यूनिट में नमक हटाकर अशुद्धियां साफ की जाती हैं। रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से कोलेजन को स्थिर किया जाता है, जिसे टैनिंग कहा जाता है। इसके बाद फिनिशिंग, डिजाइन और वैल्यू एडिशन किया जाता है।
FDDI बिहटा: शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र
सहायक प्रबंधक रुपाश्री ने बताया कि बिहटा में एफडीडीआइ पटना की स्थापना से बिहार शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आयाम जुड़ गया है। यह संस्थान 10 एकड़ में फैला है और हास्टल में 720 छात्रों के रहने की सुविधा है। फुटवियर डिजाइन एवं प्रोडक्शन, फैशन डिजाइन और रिटेल व फैशन मर्चेंडाइज जैसे कोर्स संचालित हैं। इस उद्योग में आगे बढ़ने के बहुत अवसर हैं।
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