भागलपुर रेलवे जंक्शन।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर स्टेशन पर रूट रिले सिस्टम की व्यवस्था होगी। एक ही पैनल से ट्रेनों का होगा संचालन होगा। यार्ड आधुनिकीकरण के तहत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का काम होगा। सेंट्रलाइज पैनल बनेगा। हावड़ा और सियालदह स्टेशनों की तरह भागलपुर स्टेशन का आधुनिकीकरण किया जाएगा।
ट्रेनों से सुरक्षित परिचालन की दृष्टिकोण से सिंग्नल व्यवस्था को और बेहतर किया जाएगा। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार भागलपुर में पश्चिमी और पूर्वी कैबिन है। पूर्व तरफ इलेक्ट्रॉनिक और पश्चिमी तरफ पैनल इंटरलॉकिंग है। अभी किसी भी ट्रेन को प्लेटफार्म पर लेने के लिए दोनों पैनल के स्टेशन मास्टर को बात करनी पड़ती है। इसके बाद स्टेशन के स्टेशन मास्टर की भी स्वीकृति लेनी पड़ती है।
लेकिन रूट रिले सिस्टम होने से यह समस्या नहीं रहेगी। एक ही पैनल काम करेगा और स्टेशन मास्टर प्लेटफार्म पर ट्रेन लेने और यार्ड में ट्रेन शंटिंग का अकेले ही निर्णय ले सकेंगे। इससे लाइन बदलने या प्लेटफार्म बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके तहत सिंग्ललिंग व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा। पुराना सिस्टम हट जाएगा। सेंट्रलाइज पैनल के लिए कोचिंग डिपो सहित दो जगहों पर जमीन चिन्हित की गई है। बुधवार को मालदा डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता स्थल निरीक्षण करेंगे। इसके बाद निर्णय लिया जाएगा कि सेंट्रलाइज पैनल कहां बनना है।
- यार्ड आधुनिकीकरण के तहत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का होगा काम
- सुरक्षा की दृष्टिकोण से सिंग्नल व्यवस्था को और किया जाएगा बेहतर, सेंट्रलाइज होगा पैनल
- कल डीआरएम स्थल का लेंगे जायजा, इसके बाद निर्णय होगा किस जगह बनेगा पैनल
दूसरी ओर यार्ड परिसर में ड्रेनेज सिस्टम को विकसित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बड़हरवा से भागलपुर तक तीसरी लाइन भी बनना है। इसके पहले ही सिस्टम में बदलाव किया जाना है। इधर, यार्ड परिसर में ड्रेनेज सिस्टम को विकसित किया जाएगा। क्योंकि खासकर बरसात में पानी जमाव के कारण ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना रहती है। ड्रेनेज सिस्टम को विकसित करने से जल जमाव की समस्या नहीं रहेगी। इस विकास योजना पर 25-30 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
दूसरी ओर, भागलपुर रेलवे स्टेशन के पूर्वी दिशा की स्थित रेलवे यार्ड में परिचालन को सुरक्षित बनाने और लोकोमोटिव इंजन के सुगम आवागमन को लेकर विभाग ने कमर कस ली है। यार्ड के भीतर तीन नए लेवल क्रासिंग (एलसी) गेट लगाने की योजना तैयार की गई है। इसमें तकनीकी पेच और भारी लागत के कारण यह योजना लंबे समय से अधर में लटकी हुई है।
दरअसल, सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व में भी इस यार्ड में छोटी - छोटी घटनाएं हो चुकी है। दूसरी ओर यार्ड परिसर में ड्रेनेज सिस्टम को विकसित किया जाएगा। इसको लेकर स्थानीय इंजीनियर ने कई बार मुख्यालय स्तर पर चर्चा भी कर चुके है। |
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